शेफ विकास खन्ना का नाम देश की उन हस्तियों में है जिन्हे टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह दी है। भारतीय शेफ ने इस बात पर बेहद ख़ुशी ज़ाहिर की है कि कभी अपमानजनक माना जाने वाला ‘करी बॉय’ अब सम्मान का प्रतीक बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मशहूर शेफ विकास खन्ना ने इस सम्मान को ‘भारत के लिए एक बहुत बड़ा क्षण’ बताया। फैशन, साहित्य और पाक कला के क्षेत्र में नाम पाने वाले में विकास को जगह मिली है। इस सूची में राल्फ लॉरेन और विक्टोरिया बेकहम जैसे नाम भी शामिल हैं।
बीते दिन बुधवार को सार्वजनिक की गई इस लिस्ट में अपना नाम होने की जानकारी जब विकास खन्ना को मिली तो उनका कहना था, ‘मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी बहन स्वर्ग से मेरे लिए लड़ रही हो। हमारे जैसे लोगों को, जिन्हें वे यहां ‘करी बॉय’ कहते हैं, दुनिया की सर्वोच्च सम्मानित सूची में शामिल करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।’ बताते चलें कि विकास खन्ना को इसकी जानकारी उनकी दिवंगत बहन राधिका खन्ना के जन्मदिन पर मिली।
मीडिया से बात करते हुए विकास का कहना था कि पश्चिमी देशों में ‘करी’ शब्द का प्रयोग अपमानजनक रूप में किया जाता रहा है, खासकर दक्षिण एशियाई लोगों को नीचा दिखाने के लिए। आगे वह कहते हैं कि अब यह शब्द गर्व और सम्मान का प्रतीक बन गया है।
इस शब्द को गर्व से जोड़ते हुए विकास का कहना है कि उन्हें लगता है कि यह वह भोजन है जो हमारी दादी-नानी ने हमें खिलाया था, और हमारा शरीर और मस्तिष्क उसी से संचालित होता है। उनके मुताबिक़, अधिकांश भारतीय पूरी दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। मेरे यहां बहुत सारे रिश्तेदार हैं। सभी बच्चे उनका मज़ाक उड़ाते थे या कहते थे कि यहां से करी की बदबू आ रही है। अब एक ‘करी बॉय’ को उस मंच पर आने का मौका मिल रहा है जहां दुनिया के कुछ ही चुनिंदा लोग पहुंच पाए हैं।
बताते चलें कि टाइम पत्रिका द्वारा सौ लोगों की इस सूची में अभिनेता रणबीर कपूर, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलोन मस्क के अलावा बांग्लादेश और नेपाल के प्रधानमंत्री का नाम भी शामिल है।
विकास ने अमरीकी राष्ट्रपतियों के लिए लंच और डिनर भी होस्ट किए है। बंगलो नाम का एक रेस्टोरेंट चलाने वाले विकास खन्ना का ये सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी दादी से खाना बनाना सीखा था। मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अमृतसर में छोले-भटूरे बेचने शुरू किए। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए देश के बाहर एक नया सफर शुरू किया। इस सफर में उन्होंने अमरीकी सड़कों पर कभी ढोकले और कभी समोसे बेचे। मगर आज वह विदेशी धरती पर भारतीयों के लिए गर्व बने हुए हैं।