नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS) सीटों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को 50 से घटाकर 30 कर दिया गया है। ये सोचना केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दे दी गई है। इसके साथ सरकार ने तमिलनाडु से संबंधित सेवा में रहने वाले डॉक्टरों की 40 खाली सीटों को राज्य को वापस लौटाने पर भी सहमति जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र के नोट के परिणामस्वरूप अब NEET-SS में 30 पर्सेंटाइल और उससे अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवार इस स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड में भाग ले सकेंगे। नोट के मुताबिक़, सुपर स्पेशलिटी की रिक्त सीटों को भरने के संबंध में मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी/स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के परामर्श से विचार किया गया था।
जस्टिस पी एस नरसिम्हा की अगुवाई वाली बेंच वाले इस मामले में तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील ए एम सिंघवी ने किया। याचिकाकर्ता ‘तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन’ की ओर से वरिष्ठ वकील पी विल्सन रहे।
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक नोट में केंद्र सरकार ने कहा- ‘संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श के बाद इस मामले पर फिर से विचार किया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपलब्ध सुपर स्पेशलिटी सीटें खाली न रहें और उपलब्ध प्रशिक्षण क्षमता का बेहतर उपयोग हो सके, यह निर्णय लिया गया है कि प्रस्तावित ‘स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड’ के उद्देश्य से NEET-SS के लिए पात्रता पर्सेंटाइल को मौजूदा 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 30 पर्सेंटाइल कर दिया जाए।’
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस फैसले के बाद करीब 6,000 अतिरिक्त उम्मीदवार भाग ले सकेंगे। इससे वर्तमान में रिक्त सीटों की संख्या की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक उम्मीदवारों का एक पूल उपलब्ध हो सकेगा। अब कुल 1,857 खाली सीटों के मुकाबले लगभग 6,000 पात्र उम्मीदवार होंगे।
केंद्र सरकार के नोट में आगे कहा गया, ‘यह भी फैसला लिया गया कि तमिलनाडु राज्य के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में और विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए, तमिलनाडु से संबंधित 40 खाली इन-सर्विस सीटों को राज्य सरकार को वापस सौंप दिया जाएगा। इसका सीमित उद्देश्य यह होगा कि राज्य एक सप्ताह की अवधि के अंदर अपना खुद का ‘स्ट्रे वैकेंसी राउंड’ आयोजित और पूरा कर सके।’
रिपोर्ट से पता चलता है कि केंद्र के नोट के मुताबिक़, NEET-SS काउंसलिंग के दूसरे दौर के पूरा होने के बाद, वर्तमान में 1,857 सुपर स्पेशलिटी सीटें रिक्त हैं। जिनमें 1,094 डीएम/एम.सीएच. सीटें है जबकि 763 डीएनबी-एसएस की सीटें हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या में सीटें अत्यधिक विशिष्ट चिकित्सा (मेडिकल) और शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विषयों से संबंधित हैं।
इससे पहले मंत्रालय ने 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि एक ‘स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड’ आयोजित किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने केंद्र से पात्रता पर्सेंटाइल को घटाने के मुद्दे पर फिर से विचार करने के लिए भी कहा था, विशेष रूप से रिक्त पड़ी सुपर स्पेशलिटी सीटों की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए।
रिपोर्ट के अनुसार, खाली सीटें केवल उन उम्मीदवारों को दी जा सकती हैं जो NEET-SS काउंसलिंग के पिछले दौरों में किसी सीट पर शामिल नहीं हुए हैं और जो पात्रता पर्सेंटाइल में की गई इस कटौती के परिणामस्वरूप इसके पात्र बन गए हैं, नोट में आगे कहा गया।
गौरतलब है कि नोट में आगे कहा गया कि राज्य के स्ट्रे वैकेंसी राउंड के पूरा होने के बाद भी यदि कोई सीट रिक्त रह जाने पर एमसीसी के पास उपलब्ध खाली सीटों के पूल में जोड़ दिया जाएगा। इन सीटों के साथ-साथ अन्य खाली सुपर स्पेशलिटी सीटों के लिए विशेष स्ट्रे वैकेंसी राउंड एमसीसी द्वारा दो सप्ताह के भीतर आयोजित और पूरा किया जाएगा।
गौरतलब है कि अपग्रेडेशन का प्रावधान पहले से ही उपलब्ध था और मौजूदा NEET-SS काउंसलिंग के राउंड 1 और राउंड 2 के बीच इसकी अनुमति दी गई थी। इसमें कहा गया कि जिन उम्मीदवारों ने राउंड 2 में भाग लिया था उनके पास अपने राउंड 1 के आवंटन (अलॉटमेंट) से अपग्रेडेशन प्राप्त करने का अवसर था।
केंद्र द्वारा जारी नोट में कहा गया, ‘चूंकि शैक्षणिक सत्र पहले ही शुरू हो चुका है और काफी समय बीत चुका है, इसलिए जो उम्मीदवार पहले ही सीटों पर शामिल हो चुके हैं, उन्हें आगे अपग्रेडेशन की अनुमति देने से शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई महीनों बाद उम्मीदवार एक सुपर स्पेशलिटी सीट से दूसरी सीट पर ट्रांसफर हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, इस तरह के अपग्रेडेशन के बाद खाली होने वाली सीटें फिर से खाली हो जाएंगी, जिससे उन्हें आगे के काउंसलिंग राउंड में शामिल करना जरूरी हो जाएगा और संभावित रूप से ऐसी सीटें खाली ही रह सकती हैं।’
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद यानी तमिलनाडु द्वारा काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद तय की है। तमिलनाडु में सेवारत सरकारी डॉक्टरों के लिए याचिकाकर्ता ने आरक्षित 152 खाली सुपर स्पेशलिटी सीटों को समय से पहले ही ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।