सबसे पहले बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा- जी-20 में प्रधानमंत्री मोदी का सन्देश

जी-20 सम्‍मेलन ब्राजील में हो रहा है। सम्मलेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्बोधित करते हुए बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने इसके निदान पर भी बात की। साथ ही उन्‍होंने भारत की सफलता का मंत्र भी बताया। यह मंच विश्व राजनीति से अलग रखे गए देशों को अपनी बात रखने का अवसर देता है।

सबसे पहले बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा- जी-20 में प्रधानमंत्री मोदी का सन्देश

रियो डी जेनेरियो में दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी सहित अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किअर स्टॉर्मर के अलावा अन्य नेताओं ने शिरकत की।

जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- ‘‘मैं यह कहना चाहूंगा कि वैश्विक संघर्षों के कारण खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट से ‘ग्लोबल साउथ’ के देश सबसे अधिक प्रभावित हैं।’’

आगे उन्होंने यह भी कहा- ‘‘इसलिए हमारी चर्चा तभी सफल हो सकती है जब हम ‘ग्लोबल साउथ’ की चुनौतियों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखें। ‘ग्लोबल साउथ’ का आशय कमजोर या विकासशील देशों से है।

यह लगातार चौथा वर्ष है जब जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ के किसी देश द्वारा की जा रही है। इस बार ब्राजील जी-20 समिट की मेजबानी कर रहा है। 2023 में भारत द्वारा समूह की अध्यक्षता ग्रहण की गई थी। ब्राजील इस आयोजन के बाद दक्षिण अफ्रीका को अध्यक्षता सौंप देगा। इस तरह से इस राष्ट्रों के बीच रचनात्मक सहयोग का चक्र बना रहेगा।

पश्चिमी-प्रभुत्व वाले ढांचों के विकल्प की तलाश में कोविड महामारी के बाद से जब मध्य-पूर्व और यूक्रेन युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में जी-20 और ब्रिक्स जैसे मंच विश्व पटल पर एक मज़बूत इच्छा शक्ति को प्रदर्शित करते हैं। यह उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक शासन के सामने अपना मोर्चा संभाले हैं।

पिछले साल अफ्रीकी संघ भारत की अध्यक्षता में जी-20 का स्थायी सदस्य बना था। वैश्विक मंच जी-20 की अध्यक्षता की भूमिका निभाने वाला दक्षिण अफ्रीका पहला अफ्रीकी देश है। कह सकते हैं कि लंबे समय से यह पूरे अफ्रीका महाद्वीप की एकमात्र आवाज रहा है।

बताते चलें कि यह लगातार चौथा वर्ष है जब जी-20 की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ के किसी देश द्वारा की जा रही है। साल 2022 में इंडोनेशिया से इसकी शुरुआत हुई थी। जी-20 का नेतृत्व वैश्विक मुद्दों पर अधिक समावेशी संवाद को भी प्रोत्साहित करने के साथ विकासशील देशों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

साथ ही ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ब्रिक्स समूह भी एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरकर सामने आया है। जो एकता और प्रगति की भावना को बढ़ावा देता है। इस मंच की मदद से यह देश अपनी जरूरतों और चिंताओं को व्यक्त करने के लिए सहयोगी स्थान प्रदान करता है।

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