रेडियो की दुनिया में क्रांति लाने वाले अमीन सयानी नहीं रहे

आवाज़ कभी मरती नहीं। अलविदा होने के बाद भी। एक ऐसी ही आवाज़ आज हमसे जुदा ज़रूर हुई है, मगर फ़ना नहीं। ये आवाज़ थी- “नमस्कार भाइयों और बहनों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं।”

रेडियो की दुनिया में क्रांति लाने वाले अमीन सयानी नहीं रहे

अमीन सयानी का मुंबई में 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके बेटे रजिल सयानी ने उनके निधन की जानकारी दी और बताया कि अमीन सयानी को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाय गया। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को होगा।

चार दशक से भी ज़्यादा आवाज़ की दुनिया में काम करने वाले इस रेडियो कलाकार ने 1952 से 1994 तक रेडियो शो गीतमाला को होस्ट किया। इस शो की लोकप्रियता का कारण अमीन सयानी की दिलकश आवाज़ और अदायगी थी।

अमीन सयानी का जन्म 21 दिसंबर 1932 को मुंबई में हुआ। इनका परिवार एक मल्टीलिंगुअल फैमिली के रूप में जाना जाता था। सयानी ने बतौर रेडियो प्रेजेंटर अपने करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई से की थी। यहाँ उनको लाने वाले उनके भाई हामिद सयानी थे।

प्रारम्भ में अमीन अंग्रेजी कार्यक्रमों का हिस्सा रहे। फिर दिसंबर 1952 में उन्हें अवसर मिला रेडियो शो गीतमाला को पेश करने का। इस ज़िम्मेदारी को उन्होंने ऐसा निभाया कि रेडियो की पेशकश की दुनिया में क्रांति ही ला दी। उनकी कोशिश होती थी कि हर श्रोता बस यही महसूस करे कि वह उस से ही मुखातिब हैं।

 

रेडियो सेलोन पर बिनाका गीतमाला के नाम से ब्रॉडकास्ट अमीन सयानी का यह शो 30 मिनट का होता था और देश के कोने कोने से लोग इसे सुनने के लिए बेताबी से इन्तिज़ार करते थे।

बाद में बिनाका गीतमाला का नाम बदलकर सिबाका गीतमाला हुआ और इसे हिट परेड नाम से भी ब्रॉडकास्ट किया गया। लोकप्रियता के पायदान की सीढ़ियां चढ़ता ये शो बाद में गीतमाला शो ऑल इंडिया रेडियो और विविध भारती पर ब्रॉडकास्ट किया गया।

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