अडानी समूह के जवाब ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को साज़िश बताया

एशिया के सबसे रईस उद्योगपति गौतम अडानी के समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। वित्तीय शोध कंपनी द्वारा लगाए गए इन आरोपों को झूठ बताते हुए देश, उसकी संस्थाओं और विकास पर सुनियोजित हमला बताया है। इस सम्बन्ध में अडानी समूह की ओर से 413 पन्नों का जवाब दिया गया है।

अडानी समूह के जवाब ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को साज़िश बताया

अडानी समूह की रिपोर्ट, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को मिथ्या धारणा बनाने वाली एक छिपी हुई मंशा बता रही है। इसके पीछे अमेरिकी कंपनी को वित्तीय लाभ मिलने के मक़सद को एजेंडा बताया गया है।

अडानी समूह का कहना है कि- ‘‘यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि भारत, भारतीय संस्थाओं की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता तथा भारत की विकास गाथा एवं महत्वाकांक्षाओं पर एक सुनियोजित हमला है।’’

अडानी समूह इन आरोपों को निराधार और शर्मनाक बता रहा है और इसे किसी गुप्त मकसदके तहत साज़िश का दर्जा दे रहा है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर गौतम अडानी का जवाब इसे झूठ के सिवाय कुछ नहीं मानता। अडानी समूह का कहना है कि ये दस्तावेज चुनिंदा गलत सूचनाओं एवं छुपाकर रखे गए तथ्यों का एक दुर्भावनापूर्ण संयोजन हैं।

अडानी ग्रुप की रिपोर्ट अपने जवाब के ज़रिये हिंडनबर्ग की विश्वसनीयता एवं नैतिकता पर सवाल उठा रही है। इसमें कहा गया है कि रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण इरादे से जारी की गई, यह इस बात से स्पष्ट है कि इसे ऐसे समय में जारी किया गया, जब अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड भारत में इक्विटी शेयरों की अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक पेशकश कर रहा है।

गौरतलब है कि 24 जनवरी को सामने आने वाली न्यूयॉर्क की कंपनी ‘हिंडनबर्ग’ की रिपोर्ट में उद्योगपति गौतम अडानी की अगुवाई वाले समूह पर ‘‘‘खुले तौर पर शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’’’ में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अडानी ग्रुप की कंपनी पर इस आरोप के बाद कारोबार से जुड़े समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के जवाब में अडानी समूह का कहना है कि वह अपनी प्रमुख कंपनी के शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तहत बिना सोचे समझे काम करने के लिए अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेंगे। इसके लिए कम्पनी कानूनी विकल्पों पर गौर कर रही है। दूसरी ओर अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च का कहना है कि वह अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम है।

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