चीन में मिलने वाली दस लाख साल पुरानी एक मानव खोपड़ी ने शोधकर्ताओं को एक नए सिरे से सोच में डाल दिया है। अभी तक ज्ञात जानकारी के मुताबिक़ मानव प्रजाति होमो सेपियन्स की शुरुआत आज से करीब पांच लाख साल पहले हो गई थी।

यह खोज ‘साइंस’ मैगज़ीन में छपी है। एक चौंकाने वाले विश्लेषण के तहत नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम के प्रोफेसर क्रिस स्ट्रिंगर कहते हैं कि इस नई खोज ने दिमाग वाले इंसानों के विकास की टाइमलाइन को कम से कम पांच लाख साल पीछे खिसका दिया है। प्रोफेसर क्रिस स्ट्रिंगर इस रिसर्च के को-लीड हैं और उनका कहना है- “हमारी धरती पर होमो सेपियन्स के दस लाख साल पुराने जीवाश्म कहीं न कहीं मौजूद होंगे, बस अभी तक हमने उन्हें खोजा नहीं है।”
इस खोपड़ी को खोजने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे युनशियन 2 नाम दिया। साथ ही उन्होंने माना कि यह हमारे शुरुआती पूर्वज होमो इरेक्टस की है। गौरतलब है कि होमो इरेक्टस बड़े दिमाग़ वाले शुरुआती इंसान थे। होमो इरेक्टस के विकास का एक लंबा दौर गुज़रा और करीब छह लाख साल पहले यह दो हिस्सों में बंट गया। इनमे से एक नियंडरथल्स बने और दूसरे होमो सेपियन्स प्रजाति।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके सही साबित होने पर शुरुआती मानव इतिहास की एक अहम कहानी बदल जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस खोज से यह भी समझ आता है कि हम नियंडरथल्स जैसी दूसरी मानव प्रजातियों के साथ पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा लंबे समय तक साथ रहे। हालाँकि कुछ और एक्सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि ये नतीजे मुमकिन तो हैं, पर अभी पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं।
इस बीच युनशियन 2 की जांच के बाद विशेषज्ञों का एक मत यह भी है कि यह होमो इरेक्टस नहीं है। बल्कि यह भी माना जा रहा है कि यह होमो लॉन्गी का शुरुआती रूप है। इसे नियंडरथल्स और होमो सेपियन्स की तरह ही विकसित होने वाली एक सिस्टर स्पीशीज़ कहा जा रहा है।
ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर युनशियन 2, दस लाख साल पहले धरती पर थे तो मुमकिन है कि नियंडरथल्स और होमो सेपियन्स का शुरुआती रूप भी उसी दौर में मौजूद रहा हो।
रिसर्च बताती हैं कि अफ़्रीका में शुरुआती होमो सेपियन्स का सबसे पुराना सबूत 3 लाख साल पुराना है। ऐसे में कयास लगाया गया कि हमारी प्रजाति शायद सबसे पहले एशिया में विकसित हुई हो।
इस खोज के बाद अब वैद्यानिकों का मत है कि धरती पर तीनों मानव प्रजातियां लगभग 8 लाख साल तक साथ रहीं, जो पहले माने गए समय से कहीं अधिक है। वैज्ञानिक यह कयास भी लगा रहे हैं कि मुमकिन है कि इस समयकाल इन प्रजातियों की मुलाक़ात और प्रजनन भी के अवसर आए हों।
फिलहाल इस खोज ने जहाँ कई रहस्य सामने लाए हैं वहीँ मानव इतिहास से जुड़े कई सवालों पर से पर्दा हटाने का अवसर भी दिया है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में कई और रहस्य खुलेंगे जो तस्वीर को साफ कर सकेंगे।









