देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति इस समय जिस समस्या का सामना कर रही है वह है उनकी छोटी कारों की बढ़ी मांग से बढ़े ऑर्डर की संख्या। जीएसटी कम होने के बाद नवरात्रि के चलते ऑटो कंपनियों ने रेकॉर्ड बुकिंग की है। ऐसे में कार और टू-वीलर कंपनियों की बिक्री के सारे रेकॉर्ड टूट गए हैं।

मगर अब इन कंपनियों को एक नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर ज्यादातर ग्राहक धनतेरस और दीवाली के अवसर पर नई गाड़ी की डिलीवरी चाहते हैं वहीं अब कंपनियों के लिए समय पर डिलीवरी देना मसला बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मारुति सुजुकी के पास इस समय 2.5 लाख गाड़ियों की डिलीवरी बाकी है और ज्यादातर लोग इसे दिवाली के आसपास ही चाहते हैं। कंपनी इसे समय पर पूरा करने के लिए ओवरटाइम करने को मजबूर है। रेलवे की भी मदद ली जा रही है मगर समय पर डिलीवरी आसान नज़र नहीं आ रही।
22 सितंबर के बाद ST की नई दरें लागू होने से ट्रेलरों और ट्रकों की मांग अचानक बढ़ गई। बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी गाड़ियां बनाने वाली कंपनियां भी इस अचानक बढ़ी मांग से परेशान हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि डिलीवरी की मांग अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यह मांग सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर में ही नहीं, बल्कि FMCG, ई-कॉमर्स, फैशन और लाइफस्टाइल जैसे सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है।
इस बढ़ी डिमांड के चलते ट्रक उद्योग पर भी दबाव है। हालाँकि पूरे देश में ट्रकों का बेड़ा सामान पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रहा है। सेल्स से जुड़े लोगों का भी कहना है कि समस्या स्थाई नहीं है और इस पर जल्दी ही काबू पा लिया जाएगा। अपनी तरफ से कंपनी पूरी कोशिश कर रही है कि ग्राहकों तक गाड़ियां समय पर पहुंचे।
