अपने फोन से कुछ समय के लिए दूरी बनाना ही है डिजिटल डिटॉक्स

अगर आप तनाव और पीठ व गर्दन की समस्याओं से राहत पाने के साथ अपने अन्य कामों में दिलचस्पी बढ़ाना चाहते हैं तो डिजिटल डिटॉक्स आपके लिए मददगार साबित होगा। जी हाँ! मोबाइल फोन से कुछ समय के लिए ब्रेक लेने को ही ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कहा जाता है।

ध्यान दीजिए कि क्या सुबह उठते ही सबसे पहले आप अपना फोन उठाते हैं और सोने से पहले आखिरी बार फ़ोन पर ही होते हैं? क्या फोन खो जाने पर आपको घबराहट होती है? क्या आपके दोस्त और परिवार वाले शिकायत करते हैं कि आप हमेशा अपने फोन में ही उलझे रहते हैं? अगर ऐसा है, तो शायद आपको डिजिटल डिटॉक्स की ज़रूरत है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि आप अकेले इस समस्या से नहीं जूझ रहे हैं। कंज्यूमर अफेयर्स के अनुसार, औसतन एक मोबाइल फोन उपयोगकर्ता हर दिन चार घंटे से ज़्यादा समय फोन पर बिताता है और दिन में 144 बार फोन चेक करता है। इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि मोबाइल फोन रखने वाले 98 प्रतिशत अमरीकियों में से 57 प्रतिशत यह मानते हैं कि उन्हें अपने फोन की लत लग गई है।

लेकिन डिजिटल डिटॉक्स शुरू करने से पहले, व्यावहारिक रहना ज़रूरी है। इस के लिए हर दिन फोन पर बिताए जाने वाले समय को धीरे-धीरे कम करना, अचानक फोन छोड़ देने से कहीं ज़्यादा असरदार है।

दरअसल फोन को लगातार चेक करने या स्क्रॉल करने की इच्छा डोपामाइन नामक हार्मोन से प्रेरित होती है, जो खुशी का एहसास होने पर सीधे आपके दिमाग में पहुंचता है। मोबाइल फोन डोपामाइन उत्पन्न करने में माहिर होते हैं। मजेदार टिक-टिक वीडियो, किसी करीबी दोस्त का संदेश या उनकी हालिया फेसबुक पोस्ट सभी को पसंद आती है। और ऐसे में आपका दिमाग जल्दी ही डोपामाइन के इस प्रवाह का आदी हो जाता है। बल्कि इसे बार-बार पाना चाहता है।

मोबाइल फोन की ये लत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने के साथ उन लोगों और चीजों से दूर कर सकता है जो आपके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती हैं। व्यायाम की कमी, नींद की समस्या , वजन बढ़ना, आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक अलगाव, ये सभी समस्याएं मोबाइल फोन की लत से जुड़ी हुई हैं।

डिजिटल डिटॉक्स कितने समय तक चलना चाहिए? जैसा सवाल जिन बातों पर निर्भर करता है और हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग है, लेकिन कुछ दिनों से लेकर दो सप्ताह तक का समय अक्सर आपके लिए अच्छा शुरुआती समय होता है। इससे आपको अपने फोन के साथ अपने रिश्ते का मूल्यांकन करने और कुछ नई आदतें विकसित करने में मदद मिलती है।

याद रखें कि ज्यादातर डिजिटल डिटॉक्स एक बार का उपाय नहीं है; अगर आप अपनी पुरानी आदतों में वापस लौटने लगें, तो बस एक और ब्रेक लें। संभावना है कि आप अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में कुछ सकारात्मक बदलाव देखेंगे जो डिटॉक्स के बाद भी आपके साथ बने रहेंगे और आपको प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

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