एक ओर जहाँ इज़रायल द्वारा गाज़ा पर क्रूर हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर फ़िलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा करने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है। कनाडा और माल्टा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में घोषणा की है कि वे सितंबर में फ़िलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देंगे। इससे पहले, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी फ़िलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री कार्नी की घोषणा के बाद, कनाडा फ़िलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने वाला तीसरा G-7 देश बन गया है। प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने बयान में कहा कि कनाडा लंबे समय से दोनों देशों के बीच समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और एक स्वतंत्र, व्यवहार्य और संप्रभु फ़िलिस्तीनी राज्य चाहता है जो इज़रायल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ रह सके।
इस बीच, माल्टा के विदेश मामलों के स्थायी सचिव, क्रिस्टोफर कटाज़ार ने भी संयुक्त राष्ट्र में कहा कि उनका देश लंबे समय से फ़िलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहा है। उन्होंने कहा कि माल्टा सितंबर में फ़िलिस्तीन को औपचारिक रूप से मान्यता देगा।
गौरतलब है कि फ्रांस ऐसा करने वाला पहला जी-7 देश है। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि जी-7 के अन्य सदस्य जिनमे यूके, यूएसए, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान अभी तक ऐसा नहीं कर पाए थे। मगर अब कनाडा भी फ़्रांस का हम ख़याल बन चुका है।
इस घोषणा के साथ अब माल्टा उन 145 से अधिक देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने फ़िलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी है। इनमें दर्जनों यूरोपीय देश भी शामिल हैं।
भारत द्वारा साल 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दी जा चुकी है। भारत ये फैसला लेने वाले शुरूआती देशों में था। फ्रांस से पहले 27 यूरोपीय संघ देशों में से 10 ने पहले ही फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे दी थी। बुल्गारिया, साइप्रस, हंगरी, पोलैंड और रोमानिया ने 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दे दी थी, जबकि वे यूरोपीय संघ के सदस्य देश भी नहीं बने थे।
गौरतलब है कि फ्रांस से पहले 27 यूरोपीय संघ देशों में से 10 ने पहले ही फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे दी थी। बुल्गारिया, साइप्रस, हंगरी, पोलैंड और रोमानिया ने 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दे दी थी, जबकि वे यूरोपीय संघ के सदस्य देश भी नहीं बने थे। वर्तमान में इसे संयुक्त राष्ट्र में ‘स्थायी पर्यवेक्षक राज्य’ का दर्जा प्राप्त है, जो इसे बहस में भाग लेने की अनुमति देता है, लेकिन मतदान करने की नहीं।
संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से करीब डेढ़ सौ देश फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं। यूरोप में कई देशों ने पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है, जिनमें स्वीडन, स्लोवेनिया, आयरलैंड और स्पेन शामिल हैं।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से किसी भी देश को मान्यता तभी दी जा सकती है, जब नियम और शर्तें पूरी हों। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि सभी 5 स्थायी सदस्य इस मुद्दे पर सहमत होने चाहिए, यानी इनमें से किसी का वीटो अगर लग गया तो संबंधित देश को मान्यता नहीं दी जा सकती।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमरीका हैं। ये देश सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार रखते हैं।
