हर पांचवें जानलेवा ट्रैफिक एक्सीडेंट में नींद में गाड़ी चलाने की जानकारी मिलती है। यह बिना ठीक से आराम किए गाड़ी चलाने के गंभीर नतीजों को दिखाता है। इसके बारे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि नींद में गाड़ी चलाना नशे में गाड़ी चलाने जितना ही गंभीर माना जाना चाहिए।
नींद की कमी में गाड़ी चलाना (Drowsy Driving) शारीरिक और मानसिक रूप से नशे में गाड़ी चलाने (Drunk Driving) जितना ही खतरनाक और गंभीर है। वैज्ञानिक शोध और दुर्घटनाओं के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि नींद की कमी हमारे मस्तिष्क पर ठीक वैसा ही असर डालती है जैसा कि शराब का बहुत ज़्यादा सेवन।
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के एक हालिया सर्वे के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स में 10 में से 6 से ज़्यादा ड्राइवर बहुत ज़्यादा नींद में गाड़ी चलाते हैं, जिससे रोड सेफ्टी और गाड़ी चलाते समय थकान के खतरों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सर्वे बताता है कि
18 घंटे बिना सोए रहना: यदि कोई व्यक्ति लगातार 18 घंटे तक जागता रहता है, तो उसकी गाड़ी चलाने की क्षमता और रिफ्लेक्सिस (त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता) वैसी ही हो जाती है जैसी 0.05% ब्लड अल्कोहल कंटेंट (BAC) वाले व्यक्ति की होती है।
24 घंटे बिना सोए रहना: 24 घंटे की लगातार नींद की कमी शरीर पर 0.10% BAC (रक्त में शराब की मात्रा) जितना प्रभाव डालती है। यह स्तर भारत सहित दुनिया के अधिकांश देशों में शराब पीकर गाड़ी चलाने की कानूनी सीमा (भारत में 0.03% BAC) से कहीं अधिक है।
4 से 5 घंटे की नींद: शोध बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति रात में 5 घंटे से कम सोता है, तो दुर्घटना का खतरा दोगुना से अधिक हो जाता है, जो नशे की हालत में स्टीयरिंग संभालने जितना ही जोखिम भरा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स में लगभग 145 मिलियन एडल्ट्स नींद में गाड़ी चलाते हैं, जिनमें से लगभग 35 मिलियन महीने में कम से कम एक बार ऐसा करते हैं। इसके अलावा, सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि कई ड्राइवर थकान के शुरुआती लक्षणों को पहचानने में फेल हो जाते हैं।
लगभग 40 प्रतिशत ड्राइवर बार-बार पलकें झपकाना, सिर झुकाना या कार का अपनी लेन से बाहर निकलना जैसे लक्षणों को नोटिस करने में फेल हो जाते हैं, भले ही ये बहुत ज़्यादा थकान और नींद के संकेत हों।
रिपोर्ट में दिए गए डेटा के मुताबिक, लगभग हर पांचवें जानलेवा ट्रैफिक एक्सीडेंट में नींद में गाड़ी चलाने की भूमिका होती है, जो बिना ठीक से आराम किए गाड़ी चलाने के गंभीर नतीजों को दिखाता है।
इन आंकड़ों के आधार पर जानकार इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि नींद में गाड़ी चलाने को नशे में गाड़ी चलाने जितना ही गंभीर माना जाना चाहिए।
सर्वे के मुताबिक, 62 प्रतिशत अमरीकी नागरिक नींद में गाड़ी चलाने की वजह से किसी के गंभीर रूप से घायल होने या मरने को गैर-कानूनी बनाने का समर्थन करते हैं।
रिस्क को कम करने के लिए, फाउंडेशन ने बड़ों को हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी है।
ऑर्गनाइज़ेशन ने उन ड्राइवरों को भी सलाह दी है जिन्होंने पूरी नींद नहीं ली है कि वे थके हुए गाड़ी चलाने का रिस्क लेने के बजाय ट्रांसपोर्ट का कोई दूसरा तरीका अपनाएं।
ऑर्गनाइज़ेशन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अगर कोई बहुत ज़्यादा थके होने के बावजूद गाड़ी चलाने की तैयारी कर रहा है, तो उसे समय पर चेतावनी दी जानी चाहिए।
सर्वे के नतीजों से यह पता चलता है कि नींद की कमी को सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानना कितना ज़रूरी है, क्योंकि थकान ड्राइवरों का ध्यान, अलर्ट रहने की क्षमता और सड़क की बदलती हालत पर तुरंत रिएक्ट करने की क्षमता पर असर डाल सकती है।