लखनऊ की ग़ज़ल जावेद की लिखी और देवांश अग्रवाल की निर्देशित की गई शॉर्ट फिल्म “डिटेक्टिव मीटर डाउन” ने जर्मनी में ‘इंडिशेस फिल्मफेस्टिवल स्टटगार्ट’ में बेस्ट शॉर्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता है। यह फेस्टिवल भारतीय सिनेमा के लिए यूरोप के प्रमुख फेस्टिवल में से एक है।
फिल्म की लेखिका गज़ल जावेद ने पीटीआई को बताया कि यह अवॉर्ड मंगलवार को दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 30 मिनट की यह डिटेक्टिव कॉमेडी फिल्म बिहार के ऑटो-रिक्शा ड्राइवर राजेश यादव की कहानी है, जो डिटेक्टिव बनने के सपने के साथ मुंबई आता है। फिल्म मुख्य किरदार के सफर के ज़रिए देश की आर्थिक राजधानी में बाहर से आए लोगों (माइग्रेंट्स) की ज़िंदगी, उनकी उम्मीदों और संघर्षों को हंसी-मज़ाक और इमोशन के साथ दिखाती है।
यह डिटेक्टिव कॉमेडी फिल्म बिहार के ऑटो-रिक्शा ड्राइवर राजेश यादव की कहानी है, जो डिटेक्टिव बनने के सपने के साथ मुंबई आता है। मीडिया से बात करते हुए गज़ल जावेद ने कहा कि फिल्म का मकसद समाज के पिछड़े या हाशिए पर रहने वाले वर्ग के व्यक्ति को कहानी के केंद्र में रखना है, न कि इन किरदारों को सिर्फ़ उनकी मुश्किलों के ज़रिए दिखाना।
आगे उन्होंने कहा, “मुंबई के ऑटो-रिक्शा ड्राइवर ज़्यादातर दूसरे राज्यों से आए लोग होते हैं। हमें लगा कि हर माइग्रेंट की अपनी एक कहानी होती है।” “राजेश के ज़रिए, हमने मुंबई में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हर व्यक्ति की भावनाओं और उम्मीदों को दिखाने की कोशिश की है।”
“डिटेक्टिव मीटर डाउन” शॉर्ट-फिल्म राइटर के तौर पर जावेद की पहली फिल्म है। बताते चलें कि गज़ल लखनऊ के लेखक और स्वतंत्रता सेनानी एम शकील की नवासी हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म यह संदेश भी देती है कि दुनिया में हर व्यक्ति की अपनी अहमियत और एक खास जगह होती है।
2004 से हर साल होने वाला ‘इंडिशेस फिल्मफेस्टिवल स्टटगार्ट’ भारतीय सिनेमा के लिए यूरोप के प्रमुख फेस्टिवल में से एक है। इसमें बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्मों के साथ-साथ पैरेलल सिनेमा, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में भी दिखाई जाती हैं।