जापानी बच्चों से ज़्यादा पालतू जानवरों की संख्या बढ़ने पर यहाँ पेट्स फ़ूड और डायपर का कारोबार बूम पर

इस समय की गणना बताती है कि जापान में पालतू जानवरों की संख्या जापानी बच्चों से ज़्यादा हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए बेबी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां अब पेट फ़ूड और डायपर बना रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी एशियाई देश में जन्म दर भी लगातार गिर रही है, मगर दूसरी तरफ बेबी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां अब पेट फ़ूड और डायपर की तरफ फोकस कर रही हैं। यही कारण है कि यह कंपनियां जापान में बेबी प्रोडक्ट्स बना रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स केमुताबिक, जापानी समाज में पालतू जानवरों को अब महज ‘पेट’ नहीं बल्कि ‘फॅमिली मेंबर’ की हैसियत मिली हुई है, जिसके चलते लोग उनकी सुख-सुविधाओं और सेहत पर एक बड़ी रक़म खर्च करते हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जापान की पेट केयर इंडस्ट्री साढ़े पांच बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। बेबी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां अब कुत्तों और बिल्लियों के लिए कैरियर, डायपर और दूसरे प्रोडक्ट्स बना रही हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दरअसल इस देश में जन्मदर के लगातार घटने के बीच एक अलग ही ट्रेंड दिख रहा है। वहां लोगों में कुत्ते-बिल्लियां पालने का शौक इतना बढ़ चुका है कि बच्चों के सामान से ज्यादा पेट केयर का सामान बिकने लगा है और पेट केयर इंडस्ट्री बूम कर रही है।

गिरती जन्मदर के चलते जापान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था बेहद अनोखी परिस्थितियों का सामना कर रही है। यहाँ अब इंसानी बच्चों के मुक़ाबले में पालतू जानवरों की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है।

ऐसे में सामने आने वाले इस जनसांख्यिकीय संकट के कारण जापानी कंपनियों को अपना पूरा बिजनेस मॉडल बदलने पर मजबूर कर दिया है। बच्चों के खिलौने और डायपर बनाने वाले बड़े ब्रांड्स अब अपना प्रोडक्शन समेटकर पालतू जानवरों के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स बना रहे हैं, क्योंकि जापान में जहां बच्चों का बाजार लगातार सिकुड़ रहा है, वहीं पेट-केयर इंडस्ट्री मुनाफे के सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है।

जानकारों का कहना है कि इन हालत के लिए जापान बढ़ता अकेलापन जिम्मेदार है। उनका मानना है कि इस बदलती लाइफस्टाइल की सबसे बड़ी वजह यहाँ के युवाओं का शादी और बच्चे न करने का फैसला है। जिसके कारण देश की आबादी लगातार बूढ़ी हो रही है और जन्मदर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।

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