देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस 10 जुलाई से देशभर में जनजागरण अभियान शुरू कर रही है। इसके तहत पार्टी नेता 50 शहरों में प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा सरकार की सरपरस्ती में होने वाली इस कथित हेराफेरी का मामला आगे लाएगी। पार्टी ने दावा किया कि इस राम मंदिर हेराफेरी से करोड़ों देशवासियों की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स‘ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुने गए और बीजेपी-आरएसएस से जुड़े ट्रस्ट के सदस्यों पर चंदा-चढ़ावे की हेरा फेरी और घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे करोड़ों देशवासियों की धार्मिक आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।
गुरुवार को कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर तो कार्रवाई की जा रही है, लेकिन “बड़ी मछलियों” (बड़े लोगों) को बचाने की कोशिशें हो रही हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह घोटाला सिर्फ़ दान तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद, ज़मीन की खरीद और निर्माण से जुड़ी कई बड़ी गड़बड़ियाँ भी सामने आई हैं।”
अपनी बात में जयराम रमेश का कहना है कि जब न्यासियों का चयन मोदी सरकार ने किया था तो उनके कृत्यों की जिम्मेदारी भी सरकार की ही बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी “चुप्पी” के जरिये जवाबदेही और जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनके अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर पार्टी 10 जुलाई से देशभर में व्यापक जन-जागरण के लिए पत्रकार वार्ताओं की श्रृंखला शुरू करेगी।
पोस्ट के माध्यम से जयराम रमेश ने बताया, “चंडीगढ़, जम्मू, लखनऊ, कानपुर, चेन्नई और कोयंबटूर सहित विभिन्न शहरों में पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता राम मंदिर चंदा-चढ़ावा से जुड़े घोटाले, ट्रस्ट की जवाबदेही, प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी और केंद्र सरकार के कथित दोहरे मापदंडों को लेकर अपनी बात रखेंगे।” उन्होंने कहा कि दो दिनों में यह अभियान 50 से अधिक शहरों तक विस्तारित किया जाएगा।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि मोदी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते क्योंकि उन्होंने ही मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट की स्थापना की थी, आधारशिला रखी थी और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह किया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ट्रस्ट को ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (RTI) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया और कथित “दान की चोरी” पर बीजेपी, आरएसएस और वीएचपी से जवाब मांगा।
भाजपा पर निशाना साधते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि “धर्म नहीं, बल्कि पैसा और वोट” मुख्य प्राथमिकता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में भक्तों के चढ़ावे का गलत इस्तेमाल करने से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के दावों का समर्थन किया।
गौरतलब है कि इससे पहले इस हफ़्ते, शंकराचार्य ने एसआईटी जांच की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि राम मंदिर प्रोजेक्ट के कई चरणों में गड़बड़ियाँ हुई हैं, जिनमें ज़मीन की खरीद, निर्माण और दान का प्रबंधन शामिल है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सनातन परंपराओं का अपमान करने और अयोध्या राम मंदिर सहित प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास का विरोध करने का आरोप लगाया।
बांदा में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि जहाँ BJP सरकार ने मंदिरों के विकास और सौंदर्यीकरण पर पैसे खर्च किए हैं, पिछली समाजवादी पार्टी सरकार ने ऐसे फंड का इस्तेमाल कब्रिस्तान के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाने के लिए किया था। मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्हें कब्रिस्तान पसंद हैं, और इसीलिए वे राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, विंध्यवासिनी धाम, नैमिषारण्य और चित्रकूट धाम के विकास का विरोध करते हैं।”