राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लखनऊ के अनिल कुमार रस्तोगी को पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया। रिटायर्ड साइंटिस्ट और सीनियर एक्टर को कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के कारन कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी की उम्र 82 वर्ष है और थिएटर तथा फिल्मों की दुनिया में उनकी खासी पहचाना है। वैज्ञानिक के रूप में काम करने वाले अनिल रस्तोगी ने थियेटर सहित कई फिल्मों में अभिनय किया है।
4 अप्रैल 1943 को लखनऊ में जन्में अनिल रस्तोगी सीडीआरआई में वैज्ञानिक रहे अनिल रस्तोगी ‘दर्पण’ नाट्य समूह से जुड़े रहे। सीएसआईआर के प्रतिष्ठित संस्थान सीडीआरआई, लखनऊ में बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रमुख (हेड) रह चुके हैं और एक वैज्ञानिक के रूप में भी लंबी सेवा दे चुके हैं।
उनके फिल्मी करियर की बात करें तो ‘इश्कजादे’, ‘मुल्क’, ‘रेड’ और ‘थप्पड़’ जैसी 75 से अधिक फिल्मों में उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है। इसके अलावा उन्होंने 14 वेब सीरीज और विभिन्न टीवी धारावाहिकों के करीब 500 एपिसोड में काम किया है। थियेटर की दुनिया में वह 99 नाटकों के लगभग एक हजार मंचन कर चुके हैं।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। डॉक्टर अनिल रस्तोगी को यश भारती-2017, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2023, पाटलिपुत्र लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड-2024, अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय शलाका सम्मान-2026 और कालिदास सम्मान मिल चुका है।
उनके बचपन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी कुछ इस तरह है कि उनके परिवार में बच्चों के जीवित न रहने की मान्यता के चलते बचपन में उन्हें एक बेगम साहिबा को प्रतीकात्मक रूप से सौंप दिया गया था। उन्होंने उनका नाम ‘फकीरे’ रखा, जबकि उनके बड़े भाई का नाम ‘गुलाम हुसैन’ रखा गया। मोहर्रम के दौरान घर में ताजिया रखा जाता था और वह ताबीज पहनकर फकीरी की रस्म निभाते हुए लोगों के घर जाते थे। बेगम साहिबा उन्हें खाने-पीने की चीजें दिया करती थीं।
अनिल रस्तोगी का मानना है कि, थिएटर को दिया गया वही अतिरिक्त समय आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। कला और विज्ञान दोनों को महत्व देने वाले अनिल रस्तोगी कहते हैं कि एक समय उन्हें सलाह दी गई कि साइंस और थिएटर में से किसी एक को चुन लें। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वह विज्ञान के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं छोड़ेंगे। उनके रूटीन की बात करें तो वह दिनभर अपनी वैज्ञानिक जिम्मेदारियां निभाते और बाकी लोग जब परिवार के साथ समय बिताते, तब वह थिएटर के लिए समय निकालते।