बिना ड्राइवर यानी स्वचालित ड्राइविंग वाहनों के लिए अन्तरराष्ट्रीय मानकों को मंज़ूरी दे दी गई है। इससे चालक रहित वाहनों के लिए रास्ता साफ़ हो जाएगा। इसका उद्देश्य सुरक्षा के एक समान स्तर को बनाए रखते हुए नवाचार को बढ़ावा देना है।
यह नया ढाँचा स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली से वाले वाहनों की सुरक्षा जाँच और सत्यापन के लिए एक समान अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक और साझा कार्यप्रणाली निर्धारित करता है। स्वचालित वाहनों (Autonomous Driving Systems – ADS) के लिए शुरुआती उम्मीदों के एक दशक बाद, वैश्विक नियामक ढाँचे को मिली इस स्वीकृति को, परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के योरोपीय आर्थिक आयोग (UNECE) के वाहन विनियमों के सामंजस्य के लिए विश्व मंच ने पूरी तरह चालक-रहित स्वचालित ड्राइविंग प्रणालियों (ADS) के लिए दुनिया का प्रथम नियामक ढाँचा अपनाया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वचालित वाहन कड़े सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें, जिससे देशों की सरकारों, उद्योग जगत और आम लोगों का भरोसा मज़बूत हो सके।
आयोग का यह फ़ैसला वाहनों के लिए वैश्विक स्तर पर समान नियमों की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह नियामक ढाँचा वाहन निर्माताओं को, अलग-अलग देशों में बिखरे हुए नियमों की स्थिति से बचाते हुए, स्पष्ट दिशा, उपभोक्ताओं को अधिक भरोसा और विभिन्न बाज़ारों में सुरक्षित ढंग से नवाचार को विस्तार देने का मार्ग प्रदान करता है।
प्रमुख विशेषताएँ
इस नए नियम ढाँचे की प्रमुख विशेषताओं में वाहन निर्माताओं के लिए पूरे परिचालन चक्र में सुरक्षा प्रबन्धन प्रणाली लागू करना और उसकी स्वतंत्र जाँच सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके तहत परीक्षण प्रक्रियाओं के लिए कड़े विश्वसनीयता मानक निर्धारित किए गए हैं, जिनमें आभासी (virtual) परीक्षण प्रणालियाँ भी शामिल हैं।
कम्पनियों को यह प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा कि उनकी स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली किसी भी प्रकार का अनुचित सुरक्षा जोखिम उत्पन्न नहीं करती। साथ ही, वाहनों के प्रदर्शन की निरन्तर निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है ताकि वास्तविक परिस्थितियों में सुरक्षा पर नज़र रखी जा सके।
इसके अलावा, स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली से जुड़े सुरक्षा-सम्बन्धी आँकड़ों को दर्ज करने के लिए वाहनों में विशेष डेटा भंडारण प्रणाली भी अनिवार्य होगी।
सुरक्षा पर विशेष ज़ोर
नए नियमों के अनुसार, स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली की क्षमता व प्रदर्शन एक सक्षम मानव चालक के बराबर या उससे बेहतर होना चाहिए।
स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली वाहन, चूँकि संचालन से जुड़े सभी प्रमुख कार्य, जैसे स्टीयरिंग, गति बढ़ाना या घटाना, रौशनी और संकेतों का संचालन स्वयं करेगा, इसलिए निर्माताओं को सुरक्षा अधिकारियों के समक्ष यह साबित करना होगा कि उनकी प्रणाली सुरक्षित, विश्वसनीय और यातायात नियमों के अनुरूप है। इसके लिए सिमुलेशन, परीक्षण ट्रैक और वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किए जाएँगे।
वैश्विक स्तर पर लागू करने की दिशा में क़दम
यह ढाँचा राजमार्गों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, स्वचालित ड्राइविंग के विभिन्न उपयोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
कैनेडा, चीन, योरोपीय संघ, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका सहित प्रमुख वाहन बाज़ारों ने, इन नियमों का समर्थन किया है, जिससे इसके वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने की दिशा में मज़बूत संकेत मिले हैं।
मौजूदा नियमों में संशोधन
आयोग ने, नए पूरी तरह चालक-रहित स्वचालित ड्राइविंग प्रणालियों के विनियमन के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र के लगभग 90 मौजूदा वाहन विनियमों में भी संशोधन अपनाए हैं।
इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वचालित ड्राइविंग प्रणालियों से युक्त वाहनों, यहाँ तक कि पारम्परिक चालक नियंत्रणों के बिना संचालित होने वाले वाहनों पर भी मौजूदा नियम प्रभावी रूप से लागू रह सकें।
यह व्यवस्था नियामक ढाँचे में निरन्तरता बनाए रखते हुए पूरी तरह चालक-रहित वाहनों सहित नए और अभिनव वाहन डिज़ाइनों के विकास का मार्ग साफ़ करेगी।