प्रेसिडेंट ट्रंप ने H1B वीज़ा एप्लीकेशन पर एक लाख अमरीकी डॉलर की फीस लगाई थी, लेकिन यूएस फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया है।भारतीयों को इससे फायदा मिलेगा।
एक यूएस फेडरल जज ने हाई-लेवल विदेशी कर्मचारियों को जारी किए गए H-1B वीज़ा पर प्रेसिडेंट ट्रंप की पॉलिसी को रद्द कर दिया है। इस फैसले से उन व्यवसायों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो विदेशी टैलेंट पर निर्भर हैं। साथ ही हजारों संभावित H-1B आवेदकों, खासतौर से भारतीयों को इससे फायदा मिलेगा।
प्रेसिडेंट ट्रंप ने H1B वीज़ा एप्लीकेशन पर एक लाख अमरीकी डॉलर की फीस लगाई थी, लेकिन यूएस फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। गौरतलब है कि कैलिफ़ोर्निया समेत 20 अमरीकी राज्यों ने सितंबर में घोषित प्रेसिडेंट ट्रंप के इस कदम को चुनौती दी थी। जज ने फैसले में कहा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने कांग्रेस की मंज़ूरी लिए बिना इस मामले पर कार्रवाई करके अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है।
अमरीकी डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने 20 डेमोक्रेटिक स्टेट अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर मुकदमे पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है। जज ने 42 पन्ने वाले फैसले में कहा कि, एक लाख डॉलर एक टैक्स है, चाहे आप इसे कुछ भी कहें, और ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के पास H1B वीज़ा एप्लीकेशन पर एक लाख डॉलर का टैक्स लगाने का कोई अधिकार नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी ने कोर्ट के फैसले को एक्टिविज़्म बताया है।
इस प्रोग्राम के तहत नौकरी देने वाली कंपनियाँ 1,700 डॉलर से 4,500 डॉलर तक की फीस देती हैं, लेकिन प्रेसिडेंट ट्रंप ने इसे बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया था। जज ने डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा फीस बढ़ाने को गैर-कानूनी माना क्योंकि इसे कांग्रेस (अमरीकी संसद) ने मंजूरी नहीं दी थी। बीते साल के ट्रंप के आदेश से पहले विदेशी कर्मचारी के लिए H-1b वीजा चाहने वाले नियोक्ता आम तौर पर अलग-अलग वजहों के आधार पर 2,000 से 5,000 डॉलर की फीस देते थे। इसे ट्रंप ने एक लाख डॉलर कर दिया था।
यह भी बताते चलें कि H-1B वीज़ा प्रोग्राम 1990 में कांग्रेस ने शुरू किया था। इस प्रोग्राम के तहत, यूनाइटेड स्टेट्स में बनी कंपनियाँ अलग-अलग फील्ड के विदेशी एक्सपर्ट्स को यूनाइटेड स्टेट्स में टेम्पररी नौकरी देती हैं, जो छह साल तक चल सकती है।