जलवायु संकट से निपटने की कोशिशों में अब भी उम्मीद की कई वजहें हैं

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी इस दशक के भीतर वैश्विक तापमान वृद्धि की एक अहम सीमा को पार कर सकती है। इससे दुनिया जलवायु संकट के और गम्भीर दौर के क़रीब पहुँच जाएगी। लेकिन उम्मीद की वजह भी है।

Cheaper. Cleaner. Unstoppable. Clean technologies that are delivering for the Climate शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव अपने-आप नहीं होगा। इसके लिए स्पष्ट और लगातार नीतियों, निवेश और लोगों के समर्थन की ज़रूरत होगी।

फिर भी, इन तकनीकों की तेज़ प्रगति जलवायु कार्रवाई में जुटे लोगों के लिए उम्मीद जगाती है। एक बार जब कोई तकनीक एक निश्चित स्तर तक पहुँच जाती है, तो उसका विस्तार अपने-आप और तेज़ हो सकता है। UNEP के कोपेनहेगन जलवायु केन्द्र की निदेशक ऐन ओलहॉफ़ कहती हैं, “लम्बे समय से हमारी अर्थव्यवस्थाएँ और समाज जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर रहे हैं।” आगे उनका कहना है, “लेकिन अब हम ऐसे मोड़ पर पहुँच रहे हैं, जहाँ कम से कम कुछ क्षेत्रों में, कोयला, तेल और गैस की मज़बूत पकड़ से बाहर निकलना सम्भव दिखाई दे रहा है।”

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट बताती है कि जलवायु संकट से निपटने की कोशिशों में अब भी उम्मीद की कई वजहें हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा जैसी कई जलवायु-अनुकूल तकनीकें अब ऐसे मोड़ पर पहुँच रही हैं, जहाँ वे मुख्यधारा का हिस्सा बन सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु कार्रवाई के लिए ये पाँच क्षेत्र विशेष रूप से अहम हैं।

1. नवीकरणीय ऊर्जा – सबसे सस्ता विकल्प
दुनिया के अधिकतर हिस्सों में अब सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना, नया कोयला या गैस संयंत्र बनाने से सस्ता हो गया है। इसी वजह से नवीकरणीय ऊर्जा, वैश्विक ऊर्जा निवेश का सबसे बड़ा क्षेत्र बन गई है। अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2024 में इसमें लगभग 450 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ। वर्ष 2020 से, दुनिया भर में जो नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है, उसमें से 75 प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय स्रोतों से आई है।

2. बिजली चालित वाहन
वर्ष 2025 में, दुनिया भर में बिकने वाली नई कारों में बिजली चालित वाहनों की हिस्सेदारी एक-चौथाई से अधिक हो गई, जबकि 2019 में यह 3 प्रतिशत से भी कम थी। यह बदलाव बैटरी की घटती लागत, चार्जिंग ढाँचे के विस्तार और मज़बूत नीतियों के कारण तेज़ हुआ है। उत्सर्जन कम करने के अलावा, इनके कई और लाभ हैं – स्वच्छ हवा, ईंधन ख़र्च में कमी, तेल और गैस पर निर्भरता कम होना, तथा नवीकरणीय बिजली प्रणालियों के साथ बेहतर तालमेल।

3. बेहतर इमारतें, वातानुकूलन की ज़रूरत कम कर सकती हैं
भीषण गर्मी जलवायु संकट के सबसे गम्भीर ख़तरों में से एक बनती जा रही है, ख़ासतौर पर शहरों में। शहरों का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में 5°C से 10°C तक अधिक हो सकता है, और इसका सबसे अधिक असर कम आय वाले समुदायों पर पड़ता है।

इससे निपटने का एक प्रभावी तरीक़ा है – इमारतों और शहरी स्थानों को बेहतर ढंग से आकार देना। कुछ जलवायु परिस्थितियों में, ये उपाय इमारतों के भीतर का तापमान 6°C से 9°C तक कम कर सकते हैं। इससे वातानुकूलन की ज़रूरत कम हो सकती है, या कुछ मामलों में ख़त्म भी हो सकती है। बड़े स्तर पर, यदि निष्क्रिय शीतलन उपायों को पार्कों और हरित छतों जैसे शहरी हरित क्षेत्रों के साथ अपनाया जाए, तो शहरों के उत्सर्जन में 25 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

4. ऊष्मा पम्प इमारतों को गर्म और ठंडा रखने का तरीक़ा बदल रहे हैं
इमारतें वैश्विक उत्सर्जन के लगभग 21 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़िम्मेदार हैं. इसका बड़ा भाग इमारतों को गर्म और ठंडा रखने से जुड़ा है।

ऊष्मा पम्प एक अधिक ऊर्जा-कुशल विकल्प हैं। ये इमारतों को गर्म भी रख सकते हैं और ठंडा भी, और पारम्परिक प्रणालियों की तुलना में काफ़ी कम ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ ये अधिक किफ़ायती भी साबित हो रहे हैं।

सहायक नीतियों के कारण उत्तरी योरोप के कुछ हिस्सों में इनका उपयोग पहले से ही व्यापक है। दुनिया के अन्य क्षेत्रों में भी सरकारें उपकरणों की ऊर्जा दक्षता से जुड़े मानकों को मज़बूत कर रही हैं, ताकि यह बदलाव तेज़ हो सके।

5. भोजन की बर्बादी कम करना, जलवायु कार्रवाई का कारगर उपाय
खाद्य प्रणालियाँ वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़िम्मेदार हैं। इसके बावजूद, दुनिया भर में उत्पादित लगभग एक-तिहाई भोजन बर्बाद हो जाता है, जिससे कुल उत्सर्जन में 10 प्रतिशत तक योगदान होता है।

भोजन की बर्बादी कम करना, उत्सर्जन घटाने, खाद्य सुरक्षा बेहतर करने और भूमि व जल संसाधनों को बचाने का एक बड़ा अवसर है। शहर इस बदलाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वे दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत खाद्य आपूर्ति की खपत करते हैं और उन पर कचरा कम करने व उसका बेहतर प्रबन्धन करने का दबाव बढ़ रहा है।

बेहतर खाद्य जागरूकता, मज़बूत निगरानी प्रणालियों और अतिरिक्त भोजन को लोगों तक पहुँचाने वाली तकनीकों के साथ, ये पहलें भोजन की बर्बादी कम करने और खाद्य प्रणालियों को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकती हैं।

वैश्विक तापमान बढ़ने की चिन्ताओं के बीच आने वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली चालित वाहन, बेहतर इमारतें, ऊष्मा पम्प और भोजन की बर्बादी कम करने जैसे क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, और ये साधन, कार्बन उत्सर्जन घटाने व जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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