एक नई स्टडी से पता चला है कि मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले लोगों को कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम की बात करें तो यह दरअसल कई बीमारियों का कॉम्बिनेशन है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल डिसऑर्डर (डिस्लिपिडेमिया), डायबिटीज और दूसरी बीमारियां शामिल हैं।
यह स्टडी ‘सर्कुलेशन: पॉपुलेशन हेल्थ एंड आउटकम्स’ जर्नल में पब्लिश हुई थी, जिसके अनुसार मेटाबोलिक सिंड्रोम, खासकर कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक (CKM) सिंड्रोम वाले लोगों में कैंसर का खतरा लगभग 30 फीसद तक बढ़ सकता है।
इन समस्याओं के साथ, खराब किडनी फंक्शन भी कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम में शामिल है, जिससे पूरी सेहत प्रभावित होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह स्थिति दिखाती है कि दिल, किडनी और मेटाबोलिक हेल्थ आपस में कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं और इनके एक जैसे रिस्क फैक्टर कैंसर के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस सिंड्रोम को पहले से ही दिल की बीमारी, किडनी फेलियर, स्ट्रोक, डिमेंशिया और फैटी लिवर जैसी बीमारियों से जोड़ा गया है, लेकिन हाल की रिसर्च से कैंसर के खतरे से भी इसका गहरा संबंध सामने आया है। इस शोध में जापान में 3 साल से ज़्यादा समय तक लगभग 1.4 मिलियन लोगों के डेटा की जांच की गई।
नतीजों से पता चला कि कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम की गंभीरता के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता है, स्टेज वन में खतरा 3 प्रतिशत, स्टेज 2 में 2 प्रतिशत, स्टेज 3 में 25 प्रतिशत और स्टेज 4 में 30 प्रतिशत बढ़ जाता है।
लीड रिसर्चर के मुताबिक़, इन सभी सिस्टम में खराबी भी कैंसर के खतरे से अलग-अलग जुड़ी हुई है, क्योंकि इनमें रिस्क फैक्टर एक जैसे होते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्टडी दिखाती है कि सेकेएम सिंड्रोम के तहत रिस्क फैक्टर का जमा होना अलग-अलग तरह के कैंसर के विकास में भूमिका निभा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि साइंटिस्ट के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स में लगभग 90 प्रतिशत एडल्ट्स में कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम का कम से कम एक हिस्सा होता है।
एक्सपर्ट्स ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और समय पर मेडिकल चेक-अप अपनाने से न सिर्फ दिल और किडनी की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है, बल्कि कैंसर का खतरा भी काफी कम हो सकता है।