चीन की ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी ने दुनिया में धूम मचा दी है

जापान की सबसे महंगी सफेद स्ट्रॉबेरी यानी व्हाइट ज्वेल के बाद अब चीन ने फ्रूट मार्केट में हलचल मचा दी है। इसकी रेयर ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी जो गहरे बैंगनी और लगभग काले रंग की होती हैं, ने एक नया क्रेज पैदा कर दिया है और अपने अनोखे लुक, मिठास और स्वाद की वजह से सबका ध्यान खींच रही हैं।

चीन की ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी ने दुनिया में धूम मचा दी है

इन दिनों चीन ने ब्लैक पर्ल से स्ट्रॉबेरी ने अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में हलचल मचा दी है, अपनी बहुत महंगी कीमत की वजह से, इन स्ट्रॉबेरी की तुलना एक बड़े ब्रांड, हर्मेस (the Hermes of strawberries) से भी की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी आम वैरायटी की तुलना में बहुत मीठी होती हैं, हालांकि, इनकी ऊंची कीमत का एक बड़ा कारण इनकी कमी है। हांग्जो और किंगदाओ में स्ट्रॉबेरी उगाने वाले किसानों के मुताबिक, ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी उगाना बहुत मुश्किल है और इनकी पैदावार रेगुलर स्ट्रॉबेरी की तुलना में काफी कम होती है।


सोशल मीडिया ट्रेंड और उपलब्धता की कमी की ने ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। कथित तौर पर बहुत स्वादिष्ट होती स्वाद वाली इस पैदावार से जुड़ी समस्याओं को काम करते हुए इसके उत्पादन पर ज़ोर दिया जाए तो चीन सहित दुनिया भर के लिए एक तोहफा होगा।


हाल के दिनों में, चीन में ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी वायरल हो गई हैं, जिसके बाद इनकी डिमांड बहुत बढ़ गई है। हालांकि, हर फल की कीमत 6 डॉलर तक होने के बावजूद, कई किसान इसकी खेती का ट्रेंड अपनाने से हिचकिचा रहे हैं, उनका कहना है कि मुश्किल खेती और कम पैदावार के कारण इसके आर्थिक फायदे कम हैं।

चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ हॉर्टिकल्चर के प्रोफेसर ली बिंगबिंग के अनुसार, ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी का गहरा बैंगनी या काला रंग उनमें मौजूद एंथोसायनिन की ज़्यादा मात्रा के कारण होता है। एंथोसायनिन शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जिनमें नैचुरल पिगमेंट होते हैं, जो ब्लूबेरी और बैंगनी पत्तागोभी जैसे दूसरे गहरे रंग के फलों और सब्जियों में भी पाए जाते हैं।

हालांकि सोशल मीडिया पर इसका बखान और उपलब्धता की कमी के कारण ब्लैक पर्ल स्ट्रॉबेरी को अभी एक ट्रेंड माना जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनका स्वाद वाकई बहुत बढ़िया होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसान अपनी प्रोडक्शन और खेती की समस्याओं को हल कर लें, तो ये स्ट्रॉबेरी भविष्य में न केवल चीन में बल्कि दूसरे देशों में भी आम हो सकती हैं।

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