मुख्य चुनाव आयुक्त ने आधार को केवल पहचान का प्रमाण बताया है। उन्होंने आधार को नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज से ख़ारिज करते हुए 13 मान्य दस्तावेजों की लिस्ट भी जारी की है। प्रेसवार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया जा रहा है। उन्होंने इसके तहत पुराने वोटर रिकॉर्ड की जांच और नए नामों के सत्यापन की जानकारी दी है।

चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए 13 दस्तावेजों को मान्यता दी है, जिसमें बिहार एसआईआर-2025 वोटर लिस्ट भी शामिल है। देश भर के लिए अब बिहार एसआईआर-2025 वोटर लिस्ट भी भी एसआईआर में मान्य होगी। बिहार में अभी तक 12 दस्तावेज़ मान्य थे जबकि अब मान्य दस्तावेजों की सूची में यह संख्या 13 हो गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि नए युवा मतदाता और ऐसे वोटर्स जिन्हें अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थानसे संबंधित दस्तावेज जमा कराना है। अगर वह एनुमरेशन फार्म के साथ केवल आधार की कॉपी जमा कराते हैं तो ऐसे फार्म मान्य नहीं होंगे।
ऐसे में मतदाता को अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए आधार के अलावा मान्य किए गए अन्य दस्तावेजों में से कोई ना कोई देना होगा। साथ ही आयोग ने यह भी बताया कि ऐसे वोटर, जो अपने माता-पिता वाले घर से कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, उन्हें उस ऑर्डिनरी रेजिडेंट के लिए भी कोई ना कोई सत्यापन देना होगा।
जबकि वह मतदाता जो अपने पैतृक मकान में रह रहे हैं और उनके माता-पिता का नाम एसआईआर वाली सूची में है तो उन्हें केवल अपना जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। जबकि उनका खुद का नाम अंतिम एसआईआर वाली वोटर लिस्ट में है तो उन्हें एक भी दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं होगी।
चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस राज्य की एसआईआर-2025 वोटर लिस्ट को भी 13वें दस्तावेज के रूप में मान्यता दे दी गई है। इसका फायदा उन वोटरों को मिलेगा, जो बिहार से किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट हो गए हैं। ऐसे में उनके माता-पिता का नाम अगर बिहार वाली इस वर्तमान एसआईआर वाली वोटर लिस्ट में है तो उन्हें केवल अपना जन्म प्रमाण पत्र और जहां रह रहे हैं। उसका कोई दस्तावेज देना होगा। बर्थ प्लेस का सर्टिफिकेट देने की कोई जरूरत नहीं होगी।
चुनाव आयोग द्वारा एसएआर हेतु जारी दस्तावेज इस प्रकार है-
केंद्र या राज्य सरकार/पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनर्स को जारी कोई भी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश।
सरकारी या स्थानीय प्राधिकरणों, बैंकों, डाकघरों, एलआईसी या पीएसयू द्वारा 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र या प्रमाणपत्र।
पासपोर्ट।
जन्म प्रमाणपत्र जो किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी हो।
मैट्रिकुलेशन या शैक्षणिक प्रमाणपत्र जो किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया हो।
स्थायी निवास प्रमाणपत्र जो राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया हो।
वन अधिकार प्रमाणपत्र
जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST) जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया हो।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से संबंधित प्रमाणपत्र (जहां यह लागू है)।
फैमिली रजिस्टर, जो राज्य या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया हो।
भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र, जो सरकार द्वारा जारी किया गया हो।
आधार कार्ड से जुड़ी आयोग की दिशा-निर्देश पत्र संख्या 23/2025-ERS/Vol.II दिनांक 09.09.2025 के अनुसार लागू होंगे।
बताते चलें कि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वोटर लिस्ट को माइक्रो लेवल पर शुद्ध करने की प्रक्रिया है। देश में 1951 से 2004 के बीच यह आठ बार किया जा चुका है। यह करीब सात साल बाद होना चाहिए मगर इस बार यह 21 साल बाद यह किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए जाते हैं जिनकी मृत्यु हो गई है या जो परमानेंट शिफ्ट हो गए हैं अथवा जिन्होंने एक ही राज्य में एक से अधिक वोटर कार्ड बनवा रखे हैं। इसके तहत घुसपैठियों या विदेशी वोटर के नामों को फ़िल्टर करते हुए वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है।












