भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अक्टूबर महीने के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा है कि इस माह भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने की सम्भावना है।

मंगलवार को आईएमडी ने संकेत देते हुए बताया कि आने वाले महीनों में लंबे समय तक बारिश जारी रहने की संभावना बरक़रार है। ऐसे में अक्टूबर में सामान्य से अधिक बारिश होने के आसार हैं।
मौसम विभाग ने देश में अक्टूबर के लिए 75.4 मिमी से 115 प्रतिशत अधिक बारिश होने की संभावना जताई है। अनुमान है कि अक्टूबर महीने के दौरान देश के अन्य हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहेगा। संकेत में भारत के कई इलाकों में सामान्य से अधिक ठंड के साथ-साथ आर्द्र मौसम रहने की भी बात कही गई है।
विभाग के अनुसार, इस साल देश में कुल मिलाकर 8 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। गौरतलब है कि देश में औपचारिक रूप से 30 सितंबर को चार महीने के दक्षिण-पश्चिम मानसून वाला सीजन समाप्त हो गया।
मानसून के बाद के पूर्वानुमान पर भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अक्टूबर-दिसंबर मौसम में बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, सुदूर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों को छोड़कर, भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्ट्स में आईएमडी के पूर्वानुमान ने बताया है कि अक्टूबर महीने में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होगी। ऐसे में विशेष रूप से, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के सुदूर भागों और भारत के पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।
विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन की समीक्षा करते हुए जानकारी दी कि भारत में जून से सितंबर के दौरान 937.2 मिमी बारिश हुई, जबकि एलपीए 868.6 मिमी था, यानी 8 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक महापात्र ने इस मौसम को “बेहद सफल बताते हुए यह भी स्वीकार किया कि पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में बादल फटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी मौसमी आपदाओं ने इसे प्रभावित किया।
मानसून की बारिश को असमान बताते हुए विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत को 747.9 मिमी बारिश हुई जो इसके एलपीए 587.6 मिमी से 27.3 प्रतिशत अधिक है, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत को बारिश की भारी कमी का सामना करना पड़ा। इस क्षेत्र में 1,089.9 मिमी बारिश हुई, जो इसके सामान्य 1,367.3 मिमी से 20 प्रतिशत कम है।
अध्ययनों से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इसमें कमी आई है। महापात्र ने आगे यह भी बताया कि इस साल पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश साल 1901 के बाद दूसरी सबसे कम रही। उनके मुताबिक़, सिर्फ 2013 में इससे कम बारिश दर्ज की गई थी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में हाल के कई वर्षों से बारिश कम रही है।
