भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट और महिला सुरक्षा सूचकांक (नारी) के अनुसार, 40 फीसद महिलाएँ सुरक्षित महसूस नहीं करतीं हैं।

एनआरआई 2025 रिपोर्ट उन पहलुओं को उजागर करने का प्रयास करती है जिन्हें आधिकारिक आँकड़े उजागर नहीं कर पाते। इसमें सिर्फ मामलों की गणना नहीं की जाती बल्कि अप्रतिबंधित उत्पीड़न, उसका संदर्भ और रोज़मर्रा के जीवन के अनुभव भी शामिल हैं।
दर्ज अपराध के आंकड़ों के अलावा, महिला सुरक्षा पर इस राष्ट्रीय सूचकांक से पता चला है कि भारत के शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय वार्षिक रिपोर्ट और सूचकांक 2025 भारत के सभी राज्यों के 31 शहरों की 12,770 महिलाओं की राय के आधार पर तैयार किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में, 7 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्होंने उत्पीड़न का सामना किया है, जिसमें 18 से 24 वर्ष की आयु की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा है। यह महिलाओं के खिलाफ अपराधों के दर्ज मामलों के नवीनतम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2022 के आंकड़ों से 100 गुना ज़्यादा है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्पीड़न में घूरना, चिल्लाना, अश्लील टिप्पणियाँ करना और सड़क पर चलती महिलाओं को छूना शामिल है। यह खराब बुनियादी ढाँचे, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और अकुशल सार्वजनिक परिवहन के कारण है।
शहरी क्षेत्रों में रहने वाली 40 फीसदी महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। रात के वक्त इनमें सुरक्षा की भावना सबसे कम हो जाती है। खासकर सार्वजनिक परिवहन और मनोरंजन स्थलों पर। पिछले वर्ष सात फीसदी महिलाओं को सार्वजनिक स्थलों पर उत्पीड़न झेलना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता, दिल्ली, रांची, श्रीनगर, फरीदाबाद और अन्य शहर महिलाओं के लिए बेहद असुरक्षित माने जाते हैं, जबकि मुंबई, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा), कोहिमा (नागालैंड), आइज़ोल (मिज़ोरम), गंगटोक (सिक्किम) और ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) सुरक्षित शहर माने जाते हैं।
