2023 से 2025 के बीच दुनिया के 11 उपक्षेत्रों में से आठ में युवा बेरोज़गारी या तो बढ़ी या लगभग उसी स्तर पर रही। इनमें 105 देशों में वृद्धि हुई, जबकि केवल 58 देशों में कमी दर्ज की गई।
मंगलवार को आईएलओ यानी संयुक्त राष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन जारी एक नई रिपोर्ट बताती है कि कोविड महामारी के बाद युवा बेरोज़गारी दर में कुछ कमी आई थी, लेकिन अब यह फिर बढ़ने लगी है। इस समय लाखों युवाओं के लिए कामकाज की दुनिया में पहला अहम अवसर हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।
रिपोर्ट बताई है कि, दुनिया भर में बेरोज़गार युवाओं की संख्या 6.7 करोड़ तक पहुँच गई है। साल 2023 में वैश्विक युवा बेरोज़गारी दर दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर थी। साल 2025 में 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग में यह बढ़कर 12.4 प्रतिशत हो गई।
रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर रहने वाले युवाओं की हिस्सेदारी तो अब दुनिया भर में इनकी संख्या 25.7 करोड़ युवजन की है। यह संख्या साल 2023 के 19.7 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 20 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ऐसे युवा अक्सर श्रम बाज़ार से पूरी तरह कट जाते हैं, जिससे बाद में उनके लिए कामकाज की दुनिया में लौटना और मुश्किल हो जाता है।
संयुक्त राष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ़ होंगबो का कहना है, ‘जिस पीढ़ी को सम्मानजनक कामकाज नहीं मिलता, वह आत्मविश्वास के साथ अपना भविष्य नहीं बना सकती।’ आगे उन्होंने यह भी कहा, ‘जब युवजन को अच्छे रोज़गार के अवसर नहीं मिलते, तो देशों को प्रतिभा, उत्पादकता और सामाजिक एकजुटता का नुक़सान होता है। युवाओं के लिए सभ्य कामकाज पैदा करना केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि किसी भी देश के लिए एक समझदारी भरा निवेश है।’
रिपोर्ट की मानें तो 2023 से 2025 के बीच दुनिया के 11 उपक्षेत्रों में से आठ में युवा बेरोज़गारी या तो बढ़ी या लगभग उसी स्तर पर रही। इनमें 105 देशों में वृद्धि हुई, जबकि केवल 58 देशों में कमी दर्ज की गई।
अरब देशों और उत्तरी अफ़्रीका में युवा बेरोज़गारी की दर दुनिया में सबसे अधिक है, जो क्रमशः 26.2 प्रतिशत और 22.6 प्रतिशत है। इस अवधि में सबसे तेज़ वृद्धि उत्तरी अमरीका में हुई, जहाँ युवा बेरोज़गारी दर 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 9.8 प्रतिशत हो गई। उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी योरोप में बढ़ोत्तरी अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन इन क्षेत्रों में युवा बेरोज़गारी की कुल दर अब भी 15 प्रतिशत के ऊँचे स्तर पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिक आय वाले देशों में युवजन के लिए शुरुआती स्तर के रोज़गार के अवसर कम होते जा रहे हैं, जिनसे वे आमतौर पर कामकाज की दुनिया में प्रवेश करते हैं। वहीं, उप-सहारा अफ़्रीका जैसे क्षेत्रों में आबादी तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप पर्याप्त रोज़गार पैदा नहीं हो रहे हैं।
विकासशील देशों में बड़ी संख्या में लोग अनौपचारिक या अस्थिर रोज़गार में हैं, जहाँ उन्हें अक्सर पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। रिपोर्ट के अनुसार, निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में 15 से 29 वर्ष के हर 10 में से लगभग नौ युवजन अनौपचारिक रोज़गार में हैं। यह समस्या उप-सहारा अफ़्रीका में विशेष रूप से गम्भीर है।
संयुक्त राष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने युवजन के लिए रोज़गार बाज़ार में बढ़ती मुश्किलों के कई कारण बताए हैं। इनमें धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि, भू-राजनैतिक तनाव, शुरुआती स्तर के रोज़गार पर एआई का असर, उच्च कौशल वाले नए पदों की कमी और ‘अनुभव का विरोधाभास’ शामिल हैं। यानि शुरुआती पदों के लिए भी नियोक्ताओं द्वारा पहले से अनुभव की माँग।
रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 29 वर्ष के युवाओं के 6.1 प्रतिशत रोज़गार ऐसे क्षेत्रों में हैं, जिन पर एआई से होने वाले बदलावों का गहरा असर पड़ सकता है। इनमें मुख्य रूप से लिपिकीय और प्रशासनिक काम शामिल हैं।
आईएलओ के रोज़गार, कौशल और सतत उद्यम विभाग की निदेशक सुकति दासगुप्ता ने कहा, ‘एआई समेत सभी तकनीकी प्रगति युवजन के हित में होनी चाहिए, उनके ख़िलाफ़ नहीं।’
हालाँकि, विज्ञान, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में दुनिया भर में रोज़गार के अवसर बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं के कौशल विकास और शिक्षा में अधिक निवेश की ज़रूरत स्पष्ट होती है।
युवा बेरोज़गारी से निपटने के लिए रिपोर्ट में एआई के लिए मानव-केन्द्रित नीतियाँ अपनाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में निवेश बढ़ाने, रोज़गार सेवाएँ मज़बूत करने, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने और अधिक सभ्य कामकाज के अधिक अवसर पैदा करने की सिफ़ारिश की गई है।