बीते दिन यानी 12 नवम्बर को विश्व न्यूमोनिया दिवस मनाया गया। आज भी अन्य संक्रामक बीमारियों की तुलना में न्यूमोनिया 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की जाने लेने वाला सबसे घातक रोग बना हुआ है। विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर लोगों को यह दोहराना होगा कि कुछ सावधानियां बरतकर निमोनिया से बचा जा सकता है।

निमोनिया, जिसे फेफड़ों की सूजन भी कहा जाता है, बैक्टीरिया, वायरस या कवक के कारण हो सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में सीने में दर्द, बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं, लेकिन यह स्थिति बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।
स्वास्थ्य एजेंसी का यह भी कहना है कि नवजात शिशुओं को जन्म के पहले 6 महीनों तक, अनिवार्य रूप से माँ का दूध पिलाया जाए। शिशुओं को उपयुक्त पोषण वाला भोजन खिलाया जाए और बच्चों को तम्बाकू सेवन व घरों के भीतर वायु प्रदूषण से मुक्त माहौल में रखा जाए। इस बीमारी से बचाव के लिए नीचे पाँच महत्वपूर्ण सावधानियां दी गई हैं।
वैक्सीन
टीकाकरण हर बीमारी से बचाव का पहला और सबसे प्रभावी तरीका है। निमोनिया का टीका बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचा सकता है।
स्वच्छ और स्वस्थ हवा
सर्दियों में वायु प्रदूषण और बढ़ जाता है, जिससे निमोनिया का खतरा भी बढ़ जाता है। बाहरी वायु प्रदूषण फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
हाथों की स्वच्छता
हाथों की स्वच्छता एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है। चूँकि निमोनिया के वायरस या बैक्टीरिया हाथों या दूषित सतहों से आसानी से फैल सकते हैं, इसलिए खाने और खाना बनाने से पहले, खांसने या छींकने के बाद, और बाहर से घर आने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धोना ज़रूरी है।
कमज़ोर लोगों की सुरक्षा
बच्चों के साथ-साथ 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी निमोनिया के दौरे पड़ने का विशेष खतरा होता है। अगर कमज़ोर लोगों को मधुमेह, हृदय रोग या श्वसन संबंधी समस्या है, तो निमोनिया का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए बुजुर्गों को सालाना फ्लू का टीका लगवाना चाहिए और वयस्कों को निमोनिया का टीका लगवाना चाहिए।
विशेषज्ञ संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, ज़िंक और विटामिन डी हो, जो स्वाभाविक रूप से फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं।
खतरे के संकेतों की पहचान
इलाज से पहले समय पर पहचान ज़रूरी है। कभी-कभी खांसी सामान्य नहीं होती और निमोनिया में बदल सकती है।
बच्चों में लक्षण: बहुत तेज़ साँस लेना, सीने में साँस लेना।
बुज़ुर्गों में लक्षण: तेज़ बुखार, लगातार खांसी, भ्रम, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना।
अगर परिवार के किसी सदस्य को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।















