दुनिया भर में इस समय लगभग 6 करोड़ 8 लाख घोड़े हैं। यह कहना है संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस वर्ष पहली बार विश्व घोड़ा दिवस की घोषणा की है जो 11 जुलाई को मनाया जा रहा है।

11 जुलाई को प्रथम विश्व अश्व दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र पूरी दुनिया को आमंत्रित करता है कि वे मानवता के इस वफ़ादार साथी को उनके परिश्रम के महत्व को समझें और इस प्राणी के भरोसे और धैर्य के लिए “धन्यवाद” कहें।
मंगोलिया ने विश्व घोड़ा दिवस का प्रस्ताव यूएन महासभा में पेश किया। दरअसल यहाँ घोड़े पवित्र माने जाते हैं और वे राष्ट्रीय पहचान के साथ बहुत घनिष्ठता से जुड़े हुए हैं। यहाँ के बच्चे अक्सर चलना सीखने से पहले घुड़सवारी करना सीख जाते हैं। मंगोलिया में लगभग 30 लाख 40 हज़ार लाख घोड़े हैं, यानि लगभग हर व्यक्ति के लिए एक घोड़ा।
सदस्य देशों ने इस दिवस की स्थापना के ज़रिए एक स्पष्ट सन्देश दिया है कि जानवरों को भी संवेदनशीलता और सम्मान के साथ जीने का हक़ है। घोड़ों को कई संस्कृतियों में केवल उनकी शक्ति के लिए नहीं, बल्कि उनके आध्यात्मिक अस्तित्व के लिए भी गहरी श्रद्धा से देखा जाता है।
मंगोलिया ने विश्व घोड़ा दिवस का प्रस्ताव, यूएन महासभा में पेश किया था, जहाँ घोड़े पवित्र माने जाते हैं और वे राष्ट्रीय पहचान के साथ बहुत घनिष्ठता के साथ जुड़े हुए हैं। वहाँ के बच्चे अक्सर चलना सीखने से पहले घुड़सवारी करना सीख जाते हैं।
संयुक्त राज्य अमरीका में 63 हज़ार फ़ार्मों पर लगभग 24 लाख घोड़े और खच्चर पाले जाते हैं, वहीं योरोपीय संघ में क़रीब 70 लाख घोड़े हैं और अश्व प्रजनन, खेल एवं पर्यटन क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक रोज़गार इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। मंगोलिया में लगभग 30 लाख 40 हज़ार लाख घोड़े हैं, यानि लगभग हर व्यक्ति के लिए एक घोड़ा।
2019 की पशुगणना के अनुसार, भारत में घोड़ों, टट्टुओं, खच्चरों और गधों सहित लगभग 5.4 लाख अश्व (घोड़े, गधे और खच्चर) हैं। यह संख्या 2012 की पशुगणना में 11.4 लाख थी, जिसका अर्थ है कि पिछले सात वर्षों में इनकी संख्या में 51.9% यानी 6 लाख की गिरावट आई है।
घोड़े, गधे और खच्चर ऐसे प्राणी है जो मनुष्य के सदा से साथी रहे हैं। यह खेल और उद्योग से परे, ग्रामीण जीवन के लिए अनिवार्य हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के शोध के अनुसार, लगभग 11 करोड़ 20 लाख कामकाजी घोड़े या इसी प्रजाति के अन्य जानवर, 60 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का सहारा हैं। ख़ासतौर पर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इनका महत्व और भी अधिक है।
ये पशु पानी, भोजन और अन्य आवश्यक सामानों के परिवहन में अहम भूमिका निभाते हैं। विश्व घोड़ा दिवस की यह पहल सिर्फ़ घोड़ों के लिए नहीं बल्कि तमाम जीवों के अधिकारों और गरिमा को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है। लोकगीतों में घोड़ों की वफ़ादारी और शौर्य की भावपूर्ण प्रशंसा की गई हैं। वे न सिर्फ़ एक सवारी, बल्कि आत्मा के साथी माने जाते हैं।
एक समय था जब इनसान की प्रमुख सवारी घोड़े हुआ करते थे मगर अब मशीनों के आने के साथ हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से लगभग ग़ायब हो गए हैं। आज वे ज़्यादातर खेल, पर्यटन, मनोवैज्ञानिक उपचार और मनोरंजन की दुनिया तक ही सिमटकर रह गए हैं। मगर इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने इनसानी जीवन में अपनी अहमियत खो दी है।
