22 मई विश्व जैव विविधता दिवस के नाम पर मनाया जाता है। आज का दिन याद दिलाता है कि जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की आधारशिला है और इसे संरक्षित रखना पृथ्वीवासियों की जिम्मेदारी है।

जैव विविधता का अर्थ है एक क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी तरह के जीव और पौधों, कवक और यहां तक कि बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों की विविधता जो हमारी प्राकृतिक दुनिया को बनाते हैं। ब्रिटिश जीवविज्ञानी और पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स को “जैव विविधता के जनक” की उपाधि दी गई है।
रियो डि जेनेरियो में 1992 में आयोजित “पृथ्वी शिखर सम्मेलन” में जैव विविधता पर सम्मेलन (CBD) को अपनाया गया था। विश्व जैव विविधता दिवस का विषय है- “प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास”। यह दो सार्वभौमिक एजेंडे हैं। हाल ही में जिन्हें भविष्य के लिए अपनाए गए समझौते की भावना के इसे बढ़ाए जाने की योजना है।
दरअसल यह 2030 एजेंडा तथा इसके सतत विकास लक्ष्यों एवं कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्यों और लक्ष्यों के बीच बने पुलों पर दुनिया का ध्यान दिलाने की एक कोशिश है।
इस विषय को गहराई से समझना होगा। प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहने का क्या मतलब तलाशना होगा। यही सही मायनों में प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास है।
लेकिन जैव विविधता का नुकसान हमारे स्वास्थ्य सहित सभी के लिए ख़तरा है। जैसा कि साबित हो चुका है कि जैव विविधता के नुकसान से जूनोसिस यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियाँ फैल सकती हैं, जबकि दूसरी तरफ अगर हम जैव विविधता को बरकरार रखते हैं, तो यह महामारियों से लड़ने के लिए बेहतरीन उपकरण प्रदान करता है। उदहारण के लिए कोरोनावायरस जैसी बीमारियां।
