अनुसंधान और विकास में एआई सम्बन्धित मामलों में महिला भागीदारी मात्र 12 फीसद- यूनेस्को

जहाँ एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को बदल रहा है वहीँ इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी काफ़ी कम है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना अत्यन्त आवश्यक है कि एआई प्रौद्योगिकियों के डिज़ाइन, विकास और कार्यान्वयन में महिलाओं की भागीदारी बधाई जाए।

अनुसंधान और विकास में एआई सम्बन्धित मामलों में महिला भागीदारी मात्र 12 फीसद- यूनेस्को

इस संबंध में केरल प्रदेश में अन्तरराष्ट्रीय लैंगिक एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन के दौरान, महिलाओं के लिए नैतिक एआई पर दक्षिण एशियाई (W4EAI) अध्याय की शुरूआत की गई है।

यूनेस्को के जेंडर व एआई परिदृश्य के अनुसार, आर्टिफिशियल कार्यबल में महिलाओं की भागेदारी मात्र 30 फीसद है और नेतृत्व के पदों पर यह संख्या और भी कम है। आंकड़े बताते हैं कि अनुसंधान और विकास में एआई सम्बन्धित भूमिकाओं में महिलाओं की भागेदारी केवल 12 फीसद है।

W4EAI का उद्देश्य दक्षिण एशियाई महिलाओं की आवाज़ को सशक्त करना है। याकि इस सहयोग की बदौलत एआई प्रणालियाँ इस क्षेत्र के विविध सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक सन्दर्भों को प्रतिबिंबित कर सकें।

केरल के अमृतापुरी में इन्ही मुद्दों के समाधान के लिए 2025 के अन्तरराष्ट्रीय लैंगिक एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन के दौरान, नैतिक एआई के लिए महिलाओं के दक्षिण एशियाई अध्याय (W4EAI) आरम्भ किया गया।

यूनेस्को द्वारा स्थापित W4EAI नैटवर्क के तहत, एआई नैतिकता की सिफ़ारिशों के लैंगिक अध्याय के कार्यान्वयन पर नज़र रखी जाती है।

194 सदस्य देशों द्वारा अपनाई गई इन सिफ़ारिशों का यह दक्षिण एशियाई अध्याय, क्षेत्र में समावेशी और नैतिक एआई प्रणालियाँ विकसित करने, तथा एआई के सम्पूर्ण जीवनचक्र तक महिलाओं की समान भागेदारी सुनिश्चित करने पर केन्द्रित है। इसमें डिज़ायन से लेकर लागू करने तक के मुद्दों को शामिल किया गया है।

भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका में W4EAI के दक्षिण एशियाई अध्याय की शुरूआत, एआई में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।

ऐसे में W4EAI के दक्षिण एशियाई अध्याय का लक्ष्य, इन क्षेत्रों को नैतिक एआई के लिए रूपरेखा तैयार करने में सहयोग करना होगा। यह अध्याय करियर मार्गदर्शन, नियामक प्रोत्साहन, और लिंग-संवेदनशील एआई नीतियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर काम करेगा।

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