नींद के दौरान गहराई में गिरने का एहसास क्यों होता है?

हम में से हर किसी ने कभी न कभी गहरी नींद में गिरने और फिर झटके से आंक खुलकर उठ जाने का एहसास जरूर किया होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?

नींद के दौरान गहराई में गिरने का एहसास क्यों होता है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि नींद के दौरान ऊंचाई से गिरने के इस एहसास को हाइपनिक जर्क कहा जाता है और यह तब महसूस होता है जब हम गहरी नींद में नहीं होते हैं और हमें सोये हुए कुछ ही वक़्त गुज़रता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सदमे से जागने की इस अवस्था के दौरान सोते हुए व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे वह किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी से, आसमान से या किसी ऊंचे स्थान से गिर रहा हो।

हालाँकि, जानकार इसका कोई निश्चित कारण नहीं बता सके हैं लेकिन एक कारण बहुत अधिक कैफीन के उपयोग से जोड़ा जा रहा है। इस संबंध में विभिन्न सिद्धांत भी प्रस्तुत किए गए हैं।

एक सिद्धांत के अनुसार, ऐसा तब होता है जब आप बहुत थके हुए, चिंतित या तनावग्रस्त होते हैं, या आप नींद की नींद पूरी नहीं हुई होती है।

अगर ऐसा बार-बार होता है और आपकी सोने की क्षमता खराब होती जा रही है, तो आपको मेडिकल स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

एक अन्य सिद्धांत के अनुसार, ऐसा तब महसूस होता है जब दिन भर की थकान के बाद रात में हमारी नसें आराम की स्थिति में आती हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि आप किसी ऊंचे स्थान से गिर रहे हैं।

जानकार कहते हैं कि स्वस्थ लोगों को इस स्थिति का अनुभव कम ही होता है। हालाँकि, अगर आप इस स्थिति से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सोने से पहले आपको चाय, कॉफी सहित उन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन छोड़ना होगा, जिनमें कैफीन होता है क्योंकि कैफीन मस्तिष्क को जागते रहने के लिए मजबूर करता है।

इसके विपरीत, ध्यान जैसी विश्राम तकनीकें और शयन क्षेत्र और बिस्तर को साफ और आरामदायक रखने से मदद मिल सकती है।

अगर आप भी इस स्थिति से पीड़ित हैं और अकसर झटके के साथ उठते हैं तो यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन अगर आपके साथ ऐसा बार-बार होता है और आपकी सोने की क्षमता खराब होती जा रही है, तो आपको किसी मेडिकल स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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