परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर हफ़्तों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद प्रह्लाद जोशी को भारत का शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी 2019 से कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का करीबी माना जाता है।
शनिवार को पूर्व शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हटना, युवाओं के नेतृत्व वाले उन विरोध-प्रदर्शनों की मुख्य मांगों में से एक था, जो हाल के हफ़्तों में पूरे भारत में फैल गए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए थे।
शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालने वाले 63 वर्षीय जोशी पहले से ही नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिक्षा प्रणाली पर बढ़ती निगरानी के बीच यह ज़िम्मेदारी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
मोदी सरकार में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मंत्रियों में से एक होने के नाते, जोशी को शक्तिशाली प्रधानमंत्री का करीबी माना जाता है। जिम्मेदारी दिए जाने पर उन्होंने कहा, “मैं इसे विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना के साथ स्वीकार करता हूं।”
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के लिए नियुक्त किए जाने के बाद, जोशी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे मोदी के “आभारी” हैं कि उन्होंने उन पर “भरोसा” किया और उन्हें यह ज़िम्मेदारी “सौंपी”।
प्रहलाद जोशी का अबतक का सियासी सफर
प्रहलाद जोशी का जन्म 1962 में दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था। उन्होंने हुबली के कीज़ आर्ट्स कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक की डिग्री हासिल की, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
स्नातक के बाद उन्होंने केमिकल का एक कारोबार शुरू किया। हालाँकि, उन्हें कम उम्र से ही राजनीति में दिलचस्पी थी और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। साल 2004 में जोशी को धारवाड़ ज़िले से बीजेपी का सांसद चुना गया। तब से वे लगातार पाँच बार संसदीय चुनाव जीत चुके हैं।
इससे पहले 1998 में जोशी को धारवाड़ ज़िले में बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 2014 में वे कर्नाटक राज्य के बीजेपी अध्यक्ष बने।
मई 2019 में, उन्हें मोदी कैबिनेट में संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री नियुक्त किया गया। 2024 में, जोशी ने ऊर्जा की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए कोयले का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई सुधार लागू किए।
जलवायु परिवर्तन की चिंताओं के बीच कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण उन्हें जलवायु कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों की आलोचना का सामना करना पड़ा। साल 2025 में, वे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री बने।
सरकार के अनुसार, इस विभाग के काम में “देश के लिए एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में काम करना, 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा और गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से 500 GW ऊर्जा हासिल करना और 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य प्राप्त करना शामिल है, जो भारत के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं”।
आगे की चुनौतियाँ
जोशी के सामने एक मुख्य चुनौती भारत के युवाओं की शिक्षा प्रणाली को लेकर चिंताओं का समाधान करना होगा, खासकर नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) से जुड़े घोटाले के बाद, जो दुनिया की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है।
बताते चलें कि इस साल 3 मई को भारत सहित दोहा, दुबई, सिंगापुर और काठमांडू के परीक्षा केंद्रों पर लगभग 23 लाख छात्रों ने नीट परीक्षा दी और मेडिकल कॉलेजों में 1,30,000 से भी कम सीटों के लिए मुकाबला किया।
भारत सरकार ने परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोपों के बाद 12 मई को घोषणा की कि परीक्षा रद्द कर दी गई है और दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस खबर के बाद हताश और निराश हज़ारों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। धीरे ये प्रदर्शन बढ़ते गए।
रविवार को, जोशी ने स्थिति का जायज़ा लेने और नई योजनाएँ लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री के तौर पर अपनी पहली बैठक की।