नारी सशक्तीकरण योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर महिलाओं से ठगी करने वाले आरोपी को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को लखनऊ से गिरफ्तार किए गए गिरोह के मास्टरमाइंड पर पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
ई टीवी की एक खबर के मुताबिक़, पुलिस का दावा है कि आरोपी ने उत्तर और मध्यप्रदेश की 32 से अधिक महिलाओं से करीब 2.72 करोड़ रुपये ठगी है। पुलिस को इस जालसाज़ की काफी समय से तलाश थी। इन गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
आरोपी ने प्रधानमंत्री नारी सशक्तीकरण योजना का हवाला देते हुए महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई जैसे कौशल का प्रशिक्षण देने के साथ घर बैठे रोजगार का वादा किया था।
खबर के मुताबिक़, डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त का नाम अरुण कुमार अग्निहोत्री उर्फ पंकज अग्निहोत्री है। जो सदर थाना से 25 हजार रुपये का इनामी है।
अभियुक्त अरुण कुमार अग्निहोत्री उर्फ पंकज अग्निहोत्री ने गैंग बनाकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला को ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस की अब-तक छानबीन में गैंग मास्टरमाइंड और जेल गए आरोपियों ने करीब 32 हजार महिलाओं से ठगी की बात कबूली है।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि सदर थाना पुलिस की विशेष टीम ने लखनऊ के माधव ग्रीन्स कॉलोनी से आरोपी अरुण कुमार की कार का पीछा करके गिरफ्तार किया है। मामले में अभी आरोपी आकाश सक्सेना फरार है, जिसकी तलाश जारी है। आरोपी अरुण पर मध्य प्रदेश के इंदौर समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 14 मामले हैं।
खबर से पता चला है कि अरुण कुमार अग्निहोत्री ने अपने साथियों के साथ मिलकर सार्थक वेलफेयर सोसाइटी का कार्यालय खोला था। इस संस्था को नीति आयोग से पंजीकृत बताया गया था। आरोपी प्रधानमंत्री नारी सशक्तीकरण योजना का हवाला देते हुए महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई जैसे कौशल का प्रशिक्षण देने और घर बैठे रोजगार का झांसा देकर महिलाओं को ठगी के जाल में फंसाया। आश्वासन दिया था कि प्रशिक्षण पूरा होने पर सभी को आजीवन हर माह 5 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी, जिससे ही गरीब महिलाएं इन आरोपियों के जाल में फंस गईं।
खबर में बताया गया है कि अरुण कुमार ने एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (चेन सिस्टम) की तर्ज पर योजना बनाई थी, जिसमें हर महिला को 20-25 छात्राओं को प्रशिक्षण दिलाने का लक्ष्य दिया गया था। सभी छात्राओं के रजिस्ट्रेशन के नाम पर 740 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में जमा कराए. इसके साथ ही तीन माह बाद प्रति छात्रा 2 हजार रुपये का चेक और एक किट देने का भी वादा किया था। नए लोगों को जोड़कर कमीशन कमाने का भी लालच दिया। महिलाएं घर-घर पहुंची और छात्राओं से मीटिंग करके उन्हें योजना से जोड़ा।