एक सदी पुराने विधानसभा भवन की नई ईमारत अब इस लोकेशन में बनेगी

उत्तर प्रदेश की सत्ता का केंद्र रहा विधानसभा भवन अब रिटायर होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश का नया विधान भवन लखनऊ के गोमती नगरमें तैयार किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने कंसल्टेंट-आर्किटेक्ट के चयन का टेंडर जारी कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भविष्य में परिसीमन के बाद विधायकों की बढ़ती संख्या, डिजिटल कामकाज और सुरक्षा मानकों को देखते हुए नए भवन की ज़रूरत है। ऐसे में सरकार को नए परिसर के लिए कम से कम 200 एकड़ जमीन चाहिए थी। इसके लिए गोमती नगर स्थित सहारा सिटी की 245 एकड़ जमीन लोकेशन, आकर और कनेक्टिविटी के लिहाज से मुनासिब मानी गई है।

नई लोकेशन की विपुल खंड स्थित यह 245 एकड़ जमीन पहले नगर निगम और एलडीए की थी। इस ज़मीन को सहारा इंडिया समूह को लीज पर दिया गया था। लखनऊ नगर निगम ने शर्तों के उल्लंघन और गलत इस्तेमाल के चलते 9 अक्टूबर को इस लीज को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया। इसके बाद से ही यह जमीन शासन के नियंत्रण में आ गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, प्रस्तावित नया परिसर सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें विधानसभा भवन, विधान परिषद, मुख्यमंत्री-मंत्री-विधायकों के चैंबर, विशाल पार्किंग, ग्रीन बेल्ट और सचिवालय तक को एक ही जगह लाने की बात चल रही है। इसे ‘ई-विधानसभा’ के तौर पर विकसित किया जाएगा, जहां सारा कामकाज पेपरलेस और स्मार्ट टेक्नोलॉजी से होगा।

लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ 13 मार्च को एमओयू साइन किया है। चयनित कंसल्टेंसी कंपनी को 2 महीने में जमीन की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में जमीन की सटीक सीमाएं, मौजूदा स्थिति, निर्माण की संभावनाएं और चुनौतियों का जिक्र होगा।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा 11 फरवरी को 2026-27 के बजट में नए विधान भवन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया था। शासन ने 4 फरवरी को ही एलडीए को जगह तय कर डिजाइन प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने जानकारी दी है कि इस पूरी परियोजना के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि पीडब्ल्यूडी तकनीकी पहलुओं पर काम करेगा। अंतिम निर्णय, कंसल्टेंट की रिपोर्ट आने के बाद शासन स्तर पर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने डिजाइन फाइनल होने पर प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया जाएगा।

बताते चलें कि इस ऐतिहासिक विधान भवन में करीब 403 विधायकों को बैठने की व्यवस्था है। इस इमारत का उद्घाटन 21 फ़रवरी 1928 को किया गया था। इस विधानभवन की नींव 15 दिसंर, 1922 को तत्कालीन गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने रखी थी। इसके निर्माण में करीब छह वर्ष का समय लगा था। इस भवन का उद्घाटन 21 फरवरी, 1928 को हुआ था। ईमारत का निर्माण कलकत्ता की मेसर्स मार्टिन एंड कंपनी द्वारा किया गया। मुख्य आर्किटेक्ट सर स्विनोन जैकब और हीरा सिंह थे। उस समय निर्माण के लिए 21 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। यह भवन का स्थापत्य यूरोपियन व अवधी निर्माण की मिश्रित शैली का उत्कृष्ट नमूना है।

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