‘पेगासस स्पाइवेयर’ का निशाना बने थे दो भारतीय पत्रकार

पेगासस स्पाइवेयर मामले में अब दो भारतीय पत्रकारों के नाम सामने आये हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया है कि भारतीय पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और आनंद मंगनाले को टारगेट किया गया था। इससे पहले अक्टूबर में आईफोन पर मिलने वाले ‘थ्रेट नोटिफिकेशन’ से भी ये मुद्दा चर्चा में आ चुका है।

'पेगासस स्पाइवेयर' का निशाना बने थे दो भारतीय पत्रकार

एमनेस्टी इंटरनेशनल के दावे के मुताबिक़ अब लिस्ट में इन दो पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं, जबकि अक्टूबर में आईफोन द्वारा जारी थ्रेट नोटिफिकेशन कांग्रेस नेता शशि थरूर, टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को मिला था।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वाशिंगटन पोस्ट के ट्विट को रिपोस्ट करते हुए इसे ‘आधा सच’ बताया है। साथ ही उन्होंने एप्पल कम्पनी पर निशाना साधते हुए उनकी डिवाइस को असुरक्षित बताया हैं।

गौरतलब है कि सिद्धार्थ वरदराजन द वायर के संस्थापक संपादक हैं जबकि आनंद मंगनाले ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट के साउथ एशिया एडिटर हैं।

पेगासस स्पाइवेयर मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया है कि पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और आनंद मंगनाले को टारगेट किया गया था। बताते चलें कि विपक्षी दलों के कई नेताओं के साथ इन दोनों को भी अक्टूबर में इनके आईफोन पर खतरे के नोटिफिकेशन’ मिले थे। इन मैसेज के मिलने के बाद इन दोनों ने अपने फोन एमनेस्टी इंटरनेशनल को जांच के लिए दिए थे।

द वाशिंगटन पोस्ट और एमनेस्टी इंटरनेशनल की सुरक्षा लैब द्वारा एक साझा जांच के बाद ये दावा किया गया है। अखबार ने दोनों भारतीय पत्रकारों के पेगासस स्पाइवेयर द्वारा निशाना बनाये जाने की बात कही है।

इस स्पाइवेयर का जनक इजरायली सर्विलांस फर्म एनएसओ ग्रुप है। ये ग्रुप एक साइबर-इंटेलिजेंस फर्म है, जो सरकारी एजेंसियों को सर्विलांस सॉफ्टवेयर्स का लाइसेंस देती है। गौरतलब है कि ये ग्रुप हमेशा सरकारों के साथ ही ऐसे सॉफ्टवेयर्स की डील करती है।

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