ट्रम्प का क्रूर चेहरा आया सामने, मां अपने मरते हुए बच्चे से आख़िरी बार नहीं मिल पा रही है

मौत के मुंह में खड़ा यमनी बच्चा लाइफ़ सपोर्ट पर, लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस बच्चे की मां की विनती को अब तक अस्वीकार कर रखा है


मौत के मुंह में खड़ा यमनी बच्चा लाइफ़ सपोर्ट पर, लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस बच्चे की मां की विनती को अब तक अस्वीकार कर रखा है
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा कुछ मुसलमान और ग़ैर मुसलमान देशों के नागरिकों के अमरीका सफ़र पर पाबंदी लगाए जाने की वजह से, यमन की एक मां अपने 2 साल के बेटे को अंतिम बार देखने अमरीका नहीं जा सकती जो इस समय अमरीका के कैलिफ़ोर्निया राज्य के स्टॉकटन शहर में एक अस्पताल में लाइफ़ सपोर्ट पर है।

द सैन फ़्रान्सिस्को क्रॉनिकल के अनुसार, 2 साल का अब्दुल्लाह हसन यमन में पैदा हुआ और इस समय वह दिमाग़ को प्रभावित करने वाली एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त है जिससे प्रभावित होने के केस बहुत कम सामने आते हैं। यमन का यह बच्चा हाइपोमाइलाइनेशन नामक बीमारी से ग्रस्त है। इस बीमारी की वजह से यह बच्चा न तो चल सकता है और न ही बात कर सकता है। इस बीमारी की वजह से बच्चा सांस नहीं ले पा रहा है।

इस अख़बार के अनुसार, इस बच्चे के पिता अमरीकी नागरिक हैं जो कैलिफ़ोर्निया राज्य के स्टॉकटन शहर में रहते हैं। उन्होंने अपने बेटे को पांच महीने पहले अस्पताल में भर्ती कराया और उस समय से वह अस्पताल में अपने बेटे की तीमारदारी कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस बच्चे के परिजन अब अब्दुल्लाह को लाइफ़ सपोर्ट से हटाना चाहते हैं। उन्होंने द सैन फ़्रान्सिस्को क्रॉनिकल को बताया कि अमरीकी विदेश मंत्रालय ने बच्चे की मां शाइमा स्वीलेह की अपने बेटे से मिलने की कोशिश को नज़रअंदाज़ कर दिया है। शाइमा स्वीलेह अपने बेटे से मिलने के लिए अमरीकी वीज़ा चाहती थीं।

अब्दुल्लाह के पिता अली हसन ने इस अख़बार से कहाः “उनकी मां अंतिम बार अपने बेटे को अपनी गोद में लेना चाहती है। अगर मुमकिन होता तो मैं उसे वेन्टिलेटर से हटा कर विमान के ज़रिए मां के पास ले जाता ताकि वह उसे देख ले, लेकिन वह ज़िन्दा पहुंच नहीं पाएगा।”

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने द क्रॉनिकल से कहा कि वह विशेष केस के संबंध में ब्योरा नहीं बताता।

द सैन फ़्रानसिस्को क्रॉनिकल के अनुसार, इस बच्चे के पिता यमन में पैदा हुए और 10 साल पहले स्टॉकटन में बस गए। वह अपनी बीवी से यमन में मिले थे जहां अब्दुल्लाह पैदा हुआ।

जून में अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने इस देश के राष्ट्रपति के तीसरे इक्ज़ेक्यूटिव आदेश को अनुमोदित किया जिसमें कुछ मुस्लिम बाहुल देशों और कुछ ग़ैर मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमरीका सफ़र पर पाबंदी लगायी गयी है। इस आदेश से ट्रम्प प्रशासन को इस बात की इजाज़त मिल गयी कि वह ईरान, लीबिया, सीरिया, यमन, सोमालिया, चाड और उत्तर कोरिया के नागरिकों तथा वेनेज़ोएला के लोगों के कुछ समूह के अमरीका मे प्रवेश पर रोक लगा दे। 

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