‘बच्चों को दंडित करने के बजाय उनके रिहैबिलिटेशन यानी पुनर्वास को प्राथमिकता देनी चाहिए।’ यह मानना है सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना का। जस्टिस नागरत्ना ने जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम पर एक भाषण के दौरान यह बात कही।
शीर्ष अदालत की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम को बच्चों को दंडित करने के बजाय उनके रिहैबिलिटेशन यानी पुनर्वास को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया है। उनके अनुसार- ‘जब एक बच्चा कानून तोड़ता है तो कानून को बच्चे को नहीं तोड़ना चाहिए।’
जस्टिस नागरत्ना का कहना था कि मामला हल करने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे का पुनर्वास हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ कार्यवाही पूरी होने से ही जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम की सफलता तय नहीं हो सकती।
जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम यानी किशोर न्याय प्रणाली उन कानूनों, नीतियों, और संस्थागत प्रक्रियाओं का एक समूह है जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों से संबंधित है। वयस्क आपराधिक न्याय प्रणाली के विपरीत, इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सजा देना नहीं, बल्कि उनका सुधार करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
बच्चों के साथ वयस्क की तरह बर्ताव को अनुचित मानते हुए जस्टिस नागरत्ना ने नेशनल एनुअल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ में उद्घाटन भाषण में यह बात कही। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में आयोजित ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015’ के दस साल पूरे होने के मौके पर इस आयोजन में संबोधन भाषण दे रही थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक़, गंभीर मामलों के आरोप वाले बच्चों के साथ बर्ताव से जुड़ी चुनौतियों पर बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘कानून के दायरे में आने वाले किसी बच्चे के साथ एक वयस्क की तरह बर्ताव करने का सवाल हमारे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है।’
संस्थागत कमियों की तरफ ध्यान दिलाते हुए जस्टिस नागरत्ना ने नवंबर 2025 की ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2023 में 18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में जेजेबी के सामने आए 55 प्रतिशत मामले लंबित थे। जहाँ रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जवाब देने वाले 24 प्रतिशत बोर्ड अपने सदस्यों की पूरी संख्या के बिना काम कर रहे थे।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के उद्देश्य के हवाले से जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) का उद्देश्य छोटे आपराधिक अदालतों की तरह काम करना नहीं था और कानून बच्चों में विकास और बदलाव की क्षमता को मान्यता देता है।