आज मोहर्रम की पहली तारीख है और इस मौके पर बड़ी संख्या में पर पारंपरिक शाही जरी का जुलूस निकलेगा। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शिरकत करेंगे। बुधवार को निकलने वाले इस शाही जरी का जुलूस को देखते हुए पुराने लखनऊ में यातायात व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मोहर्रम की पहली तारीख का चांद दिखने के बाद 17/18 जून से इस्लामिक माह की शुरुआत हो रही है। बुधवार शाम सात बजे बड़ा इमामबाड़ा से शाही जरी का जुलूस निकाला जाएगा, जो रूमी गेट, घंटाघर, शीशमहल, सतखंडा, रईस मंजिल होते हुए छोटा इमामबाड़ा तक जाएगा।
मुहर्रम निकलने वाला यह जुलूस शाम को सात बजे बड़ा इमामबाड़ा से शुरू होकर रूमी गेट पुलिस चौकी चौराहा, घंटाघर तिराहा, शीश महल, सतखंडा तिराहा, रईस मंजिल होते हुए छोटा इमामबाड़ा पर समाप्त होगा। इस जुलूस को देखते हुए पुराने लखनऊ में यातायात में बदलाव किया गया है। साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार किसी भी असुविधा या जानकारी के लिए नागरिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 9454405155 पर संपर्क किया जा सकता हैं। जुलूस को देखते हुए यातायात पुलिस आवश्यकतानुसार डायवर्जन लागू कर सकती है। इसके अलावा एम्बुलेंस, शव वाहन, फायर सर्विस तथा स्कूली वाहनों जैसी आपातकालीन सेवाओं को प्रतिबंधित मार्गों से भी जाने की अनुमति रहेगी।
मुख्य डायवर्जन वाले मार्ग
हुसैनाबाद से घंटाघर और छोटे इमामबाड़े की ओर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा। हरदोई रोड से आने वाला ट्रैफिक कोनेश्वर चौराहे से घंटाघर की ओर नहीं जा सकेगा।
सीतापुर रोड से आने वाले वाहन डालीगंज रेलवे क्रॉसिंग से पक्का पुल होकर बड़े इमामबाड़े की तरफ नहीं जा सकेंगे।
चौक, मेडिकल क्रॉसिंग, रूमी गेट चौकी नींबूपार्क और शाहमीना के इलाक़े में कई मार्गों पर डायवर्जन लागू रहेगा।
कैसरबाग से सीतापुर रोड और हरदोई रोड जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा।
प्रभावित मार्ग-
साथ ही सीतापुर रोड, हरदोई रोड, कैसरबाग, चौक, शाहमीना, हुसैनाबाद, नक्खास और मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा। नींबू पार्क, रूमी गेट चौकी, विक्टोरिया स्ट्रीट और घंटाघर क्षेत्र में भी यातायात प्रभावित होगा।
बताते चलें कि साल 1838 में शाही जुलूस का आगाज अवध के पहले बादशाह मोहम्मद अली शाह बहादुर ने किया था। तब से हर वर्ष यह जुलूस इसी तरह से निकाला जा रहा है।