तंबाकू से पुरुषों और महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है: रिपोर्ट

धूम्रपान से गर्भधारण में मुश्किल बढ़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी यह चेतावनी इसी सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। दुनिया भर में हर छह में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित है।

रिपोर्ट के अनुसार, धूम्रपान करने वाली महिलाओं में बांझपन (infertility) का जोखिम, धूम्रपान न करने वाली महिलाओं की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। चेतावनी में यह भी कहा गया है कि दूसरों के तम्बाकू के धुएँ के सम्पर्क में आने से (second-hand tobacco smoke) महिलाओं में बांझपन का जोखिम बढ़ सकता है और गर्भधारण की सम्भावना कम हो सकती है।

इस संबंध में डब्ल्यूएचओ की तम्बाकू-मुक्त पहल से जुड़ी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर केरस्टिन शॉटे ने कहा, “जो लोग गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, उनके लिए हमारा सन्देश है: धूम्रपान छोड़िए, अपनी सेहत और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाइए।”

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में हर छह में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित है। बांझपन प्रजनन सम्बन्धी एक ऐसी अवस्था है जिसमें 12 महीने या उससे अधिक समय तक नियमित रूप से, असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता है। दुनिया भर में हर छह में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित है।

दशकों के शोध का हवाला देते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तम्बाकू सेवन महिलाओं में बांझपन का जोखिम बढ़ा सकता है और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता व यौन स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

डब्ल्यूएचओ ने आगाह किया है कि दूसरों के तम्बाकू के धुएँ के सम्पर्क में आने से भी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह बताता है कि जो लोग ख़ुद धूम्रपान नहीं करते, उन्हें भी इसका जोखिम हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने से यह जोखिम कम हो सकता है। जो महिलाएँ धूम्रपान छोड़ चुकी हैं, उनमें धूम्रपान जारी रखने वाली महिलाओं की तुलना में बांझपन का जोखिम 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

बांझपन केवल महिलाओं से जुड़ा मुद्दा नहीं है, विषय पर ज़ोर देते हुए डब्ल्यूएचओ ने ज़ोर देकर कहा कि 60 हज़ार से अधिक पुरुषों पर किए गए 44 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि धूम्रपान कई प्रजनन संबंधी समस्याओं से जुड़ा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, धूम्रपान करने वाले पुरुषों में ये समस्याएँ अधिक पाई जा सकती हैं।

21 अध्ययनों पर आधारित शोध में पाया गया कि सिगरेट पीने से इन-विट्रो फ़र्टिलाइजेशन (IVF) जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों से गर्भधारण और जीवित शिशु के जन्म की सम्भावना कम हो सकती है।

हुक्का, ई-सिगरेट और दूसरों के धुएँ का असर
हुक्का आदि पीने से जुड़े सम्भावित जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाते हुए डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इससे पुरुषों की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालाँकि ई-सिगरेट या वेप, हुक्का, धुआँरहित तम्बाकू और अन्य नए उत्पादों के असर से जुड़े प्रमाण अभी धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और निकोटीन के अन्य उत्पाद भी प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, लेकिन इनके प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक शोध की ज़रूरत है।

जोखिम घटाने के उपाय पर रिपोर्ट में सिफ़ारिश की गई है कि स्वास्थ्यकर्मी गर्भधारण की योजना बना रहे लोगों एवं दम्पतियों को तम्बाकू सेवन से जुड़े प्रजनन जोखिमों के बारे में जानकारी दें और इसे छोड़ने के लिए प्रमाण-आधारित मदद दें। इसमें स्वास्थ्य केन्द्रों पर तम्बाकू सेवन करने वालों को नियमित रूप से धूम्रपान छोड़ने की सलाह देना भी शामिल है।

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