इस तरह बादकता नज़र आया मौसम पैटर्न

ग्लोबल वार्मिंग की बदौलत होने वाले जलवायु परिवर्तन का असर हिमाचल प्रदेश के मौसम में झलक रहा है। मानसून सीजन के दौरान यहाँ सामान्य से 42 फीसदी अधिक बारिश हुई। नतीजे में अक्तूबर के पहले ही सप्ताह में राज्य के कई रिहायशी इलाकों में बर्फबारी दर्ज की गई है।

इस तरह बादकता नज़र आया मौसम पैटर्न

इस सीज़न मानसून के दौरान प्रदेश में सामान्य से 42 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। दरअसल अरब सागर से आई अतिरिक्त नमी ने पश्चिमी विक्षोभ को और ताकतवर बनाया, जिससे बर्फबारी कम ऊंचाई तक पहुंच गई।

मौसम की सामान्य होती जा रही इन घटनाओं में पहले जो बर्फबारी नवंबर या दिसंबर में होती थी अब उसका चक्र बदल गया है। बढ़ता वैश्विक तापमान वायुमंडल में अधिक नमी पैदा करता है, जिससे भारी बारिश और उसके बाद तीव्र ठंडक या बर्फबारी की संभावना बढ़ जाती है।

मौसम के इस पारंपरिक बदलाव की झलक हिमाचल में बदलते पैटर्न में देखि जा सकती है। मौसम विभाग इसे एक नए मौसम चक्र की तरह देख रहा है। और आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ने के संकेत दे रहा है।

यहाँ रात का तापमान करीब सात वर्षों बाद इस समय शून्य से नीचे दर्ज किया गया है। पिछले सप्ताह हुई बर्फबारी से किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा और कुल्लू जिलों में हिमाचल में तप मन गिरा है। इस बीच 4 से 7 अक्तूबर के बीच सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात और निचले इलाकों में तेज बारिश हुई।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहाँ बारिश का दाैर थमते ही ठंड ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। पहाड़ों पर बर्फबारी और पछुआ हवाओं के असर से सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस होने लगी है।

विभाग का कहना है कि सोमवार को समूचे उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई हो जाएगी। इसके बाद 17 अक्तूबर तक पूरे प्रदेश में मौसम फिलहाल शुष्क रहेगा। साथ ही पछुआ हवाओं के चलते सुबह और शाम को हल्की ठंड बनी रहेगी।

पहाड़ी मौसम के बारे में मौसम जानकर बता रहे हैं कि अक्तूबर के शुरुआती हफ्ते में इतना सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ पिछले कई वर्षों में नहीं देखा गया। मानसून के बाद वातावरण में बची नमी और पश्चिमी विक्षोभ की ठंडी हवाओं के संगम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी जबकि निचले इलाकों में भारी बारिश हुई।

रिपोर्ट्स से पता चला है कि इस बार मानसून के दौरान तीन दशक बाद रिकॉर्ड बारिश हुई है। 1995 के बाद बरसात के मौसम में इस साल सबसे अधिक बारिश हुई। हिमाचल के आंकड़े बताते हैं कि 1995 में 1029 एमएल बारिश दर्ज की गई थी, इस बार 1023 एमएल बारिश हुई। इसके अलावा 50 जगह बादल फटने और बाढ़ की 98 जबकि भूस्खलन की 148 घटनाएं हुईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *