वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए संशोधन बिल को लेकर जेपीसी की तीसरी बैठक हुई

वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए संशोधन बिल पर जेपीसी यानी जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की तीसरी बैठक हुई। संसद में पेश किए गए 129वें संविधान संशोधन बिल पर चर्चा और सुझाव के लिए 39 सदस्यीय जेपीसी बनाई गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी इसके अध्यक्ष हैं।

वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए संशोधन बिल को लेकर जेपीसी की तीसरी बैठक हुई

समिति इस समय ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े विधेयकों पर विचार कर रही है। मंगलवार को होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता पीपी चौधरी ने की। बैठक में पूर्व चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित, लॉ कमीशन के पूर्व अध्यक्ष ऋतुराज अवस्थी सहित चार लॉ एक्सपर्ट्स ने कमेटी के सामने अपने मत रखते हुए सुझाव दिए।

पूर्व जस्टिस और लॉ कमीशन के पूर्व चेयरमैन ऋतुराज अवस्थी ने इस बिल का समर्थन किया। अपने प्रेजेंटेशन में उनका कहना था कि एक साथ चुनाव कराए जाने से देश का संसाधन और पैसे की बड़ी बचत होगी।

बताते चलें कि अब तक कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं। कानून मंत्रालय ने संसद की संयुक्त समिति को दी जानकारी में कहा है कि इस बिल से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से लोकतंत्र कमजोर नहीं होगा। साथ ही इससे संघीय ढांचे को नुकसान न पहुंचने की भी बात कही गई है। संसदीय समिति से कानून मंत्रालय ने यही भी बताया है कि एक साथ चुनाव कराने से राजनीति में नए चेहरों के लिए मढ़ प्रशस्त होगा।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू ललित ने भी वन नेशन वन इलेक्शन पर बनाई गई ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सम्मुख कई बातें रखीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा कि इसे चरणबद्ध तरीके से रखा जाए ताकि जो समस्या आए उसका आसानी से हल निकाला जा सके।

अपनी बात में यू ललित ने बिल के 82A अमेंडमेंट में मे (may) की जगह शैल (shall) कर देने का प्रस्ताव दिया। उनका कहना था कि ताकि आगे इसमें कोई बदलाव ना किया जा सके। साथ ही उन्होंने इस बिल की खामियों को भी दूर किए जाने की बात कही। उनके अनुसार, खामियों को दूर करने के बाद ही इसे लागू किया जाना संभव हो पाएगा।

ख़बरों के मुताबिक़, विधानसभा का कार्यकाल को छोटा किये जाने पर उन्होंने ये भी कहा कि यह एक ऐसा विषय है जिसे हल करने की आवश्यकता है वरना इसको कानूनी चैलेंज किया जा सकता है।

एक देश-एक चुनाव से अभिप्राय लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने से है। देश में यह दोनों चुनाव अभी तक अलग-अलग समय पर उनका निर्धारित काल पूरा होने पर होते हैं। इस व्यवस्था के होने पर मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय में वोट डालेंगे।

बताते चलें कि जेपीसी की पहली बैठक 8 जनवरी 2025 को हुई थी। इसमें सभी सांसदों को 18 हजार से ज्यादा पेज की रिपोर्ट वाली एक ट्रॉली दी गई थी, जिसमे हिंदी और अंग्रेजी में कोविंद समिति की रिपोर्ट और अनुलग्नक की 21 कॉपी शामिल थी साथ ही इसमें सॉफ्ट कॉपी भी थी। संशोधन बिल पर दूसरी बैठक 31 जनवरी 2025 को हुई थी। इसमें कमेटी ने बिल पर सुझाव लेने के लिए स्टेक होल्डर्स की सूची बनाई।

ख़बरों के मुताबिक़, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सवाल उठाते हुए जानना चाहा कि क्या चुनाव आयोग के पास इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम है कि सीमेलटेनियस चुनाव कराया जा सके। साथ ही उन्होंने ईवीएम की देखरेख और बड़ी संख्या में रख-रखाव को लेकर भी सवाल उठाया।

इस बैठक में मिड टर्म पोल और हंग पार्लियामेंट की के समय भी सवाल उठाए गए, जिस पर कानून मंत्रालय के अधिकारियों का कहना था कि इसका जवाब अगली बैठक में तैयारी के साथ दिया जाएगा।

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