अब से एक दशक पहले दुनियाभर के नेताओं ने पेरिस जलवायु समझौते को पारित किया था। जिसमें पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का लक्ष्य रखा गया था।

समझौते के तहत इस तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए हरसम्भव प्रयास किए जाने थे। इसी क्रम में ब्राज़ील के बेलेम शहर में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप30) में हिस्सा लेने के लिए विश्व नेता एकत्र हो रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसी सिलसिले में गुरूवार को आगाह किया कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को रोकने और उसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तत्काल क़दम उठाए जाने होंगे।
महासचिव गुटेरेश के अनुसार, वैश्विक तापमान में वृद्धि से पारिस्थितिकी तंत्रों में ऐसे बदलाव आ सकते हैं, जिन्हें फिर नहीं पलटा जा सकेगा, अरबों लोगों के लिए जीवन असहनीय हो सकता है और शान्ति व सुरक्षा के लिए ख़तरे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान को रोकने में यदि विफलता हाथ लगती है तो यह नैतिक विफलता और घातक उपेक्षा होगी। “हर वर्ष गर्म होता जा रहा है, अर्थव्यवस्थाएँ तहस-नहस हो रही हैं, असमानताएँ गहरा रही हैं और विकासशील देश सर्वाधिक पीड़ित हैं।”
उनके अनुसार, विज्ञान से यह स्पष्ट है कि अस्थाई तौर पर कुछ समय के लिए हम 1.5°C सीमा को पार कर लेंगे, जिसकी शुरुआत 2030 में हो सकती है और इसे रोका नहीं जा सकता है।
इससे बड़े पैमाने पर विध्वंस होने की आशंका है, जिसकी क़ीमत हर देश को चुकानी पड़ सकती है और इसलिए अपने तौर-तरीक़ों में बुनियादी रूप से बदलाव किए जाने होंगे ताकि इस पर जल्दी से नियंत्रण किया जा सके।
