भारतीय मूल के लोगों के लिए बनाए गए ओसीआई पोर्टल का शुभारंभ आज केंद्र सरकार की ओर से किया गया। ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया का नया पोर्टल नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं को और सरल बनाएगा।

सरकार के एक महत्वपूर्ण प्रयास के तहत यह नया पोर्टल प्रवासी भारतीयों के पंजीकरण को सरल बनाने के साथ नागरिक सेवाओं के आधुनिकीकरण में भी सहायक होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पोर्टल को नागरिक-अनुकूल डिजिटल शासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक पोस्ट को साझा किया है।
ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया योजना वर्ष 2005 में शुरू की गई। इसके तहत उन भारतीय मूल के व्यक्तियों को ओसीआई के रूप में पंजीकृत होने का अधिकार मिलता है जो 26 जनवरी 1950 या उसके बाद भारत के नागरिक थे, या उस समय नागरिक बनने के योग्य थे, या उनके वंशज हैं।
नए पोर्टल पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बताया कि यह एक अप-टू-डेट यूजर इंटरफेस के साथ तैयार किया गया है, जिसमें बेहतर कार्यक्षमता, बढ़ी हुई सुरक्षा और उपयोगकर्ता के अनुकूल अनुभव शामिल हैं।
अपनी जानकारी में गृह मंत्रालय के आगे बताया कि पुराने सिस्टम की कई तकनीकी सीमाओं को दूर करते हुए इस नए पोर्टल को अधिक प्रभावी और तेज बनाया गया है।
बताते चलें कि ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया योजना वर्ष 2005 में शुरू की गई। इसके तहत उन भारतीय मूल के व्यक्तियों को ओसीआई के रूप में पंजीकृत होने का अधिकार मिलता है जो 26 जनवरी 1950 या उसके बाद भारत के नागरिक थे, या उस समय नागरिक बनने के योग्य थे, या उनके वंशज हैं।
गौरतलब है कि ऐसे नागरिक जिनके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान, बांग्लादेश या किसी अन्य ऐसे देश के नागरिक हैं जो भारत के साथ सीमावर्ती दुश्मन देश माने जाते हैं, उन्हें ओसीआई कार्ड के लिए पात्र नहीं माना जाता।















