देश पिछले सालों की तुलना में इस बाद अधिक गर्मी का सामना करेगा और यह जानकारी दी है मौसम विभाग ने।विभाग का कहना है कि गर्मी से खासतौर पर उत्तर, पूर्वी और मध्य भारत के इलाके सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इस बढ़ती गर्मी की वजह से जल संकट, बिजली आपूर्ति में बढ़ा सहित आर्थिक चुनौतियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बार अप्रैल से जून के बीच तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे हीटवेव के मामलों में बढ़ोतरी होने की बात कही गई है। भारतीय मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में पहले ही बताया है कि साल 2025 की फरवरी अब तक की तीसरी सबसे गर्म फरवरी रही है।
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान के आधार पर चेतावनी दी है कि इस साल भारत में गर्मी का प्रकोप अधिक रहने वाला है। इन पूर्वानुमानों के हवाले से स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बार अप्रैल के अंत से ही हीटवेव को लेकर सावधान किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आईएमडी के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्र का कहना है कि इस बार उत्तर-पश्चिमी, मध्य और पूर्वी भारत में लू के सामान्य दिनों से 2 से 4 दिन अधिक देखने को मिल सकते हैं।
इस अवधि में 4 से 7 दिन तक लू चलती है, मगर इस बार यह संख्या बढ़ने की बात कही गई है। इसके अलावा, रात के तापमान में भी वृद्धि होने की संभावना है, जिससे उमस और गर्मी वाली रातें परेशानी का कारण बन सकती हैं।
आईएमडी के मुताबिक़, अप्रैल का महीना सबसे अधिक चुनौतीभरा साबित हो सकता है। इस महीने में देश के अधिकतर भागों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। जबकि, दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिमी इलाकों के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य या थोड़ा कम रहने के संकेत मिले हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्य
गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के बारे में मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश सहित गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश गिनाए हैं। दक्षिण में तमिलनाडु और कर्नाटक के उत्तरी हिस्से भी गर्मी से अधिक प्रभावित होने की बात कही गई है।
मौसम विभाग ने इस बार होने वाली अधिक गर्मी के लिए जिन कारणों का हवाला दिया है, वह इस तरह हैं-
1. एल नीनो प्रभाव (El Nino Phenomenon)
एल नीनो प्रभाव उस महासागरीय घटना है को कहते हैं जिसमे प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से इसका असर भारत में कम वर्षा और अधिक तापमान के रूप में नज़र आता है। इस वर्ष भी एल नीनो प्रभाव के कारण अधिक गर्मी होने का अनुमान है।
2. जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
धरती पर ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है। लगातार बढ़ने वाला ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी देश में तापमान में वृद्धि का प्रमुख कारण है। इसके नतीजे में गर्मी की तीव्रता और हीटवेव के मामले बढ़ रहे हैं।
3. शहरी हीट आइलैंड प्रभाव (Urban Heat Island Effect)
शहरों में अधिक तापमान की एक बड़ी वजह कंक्रीट की इमारतें, वाहन प्रदूषण और हरियाली की कमी है। मौसम विभाग का कहना है कि इन कारणों से शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक गर्मी महसूस की जाएगी।
4. मानसून की देरी (Delayed Monsoon)
अगर इस साल मानसून देरी से आता है, तो आईएमडी के अनुसार उत्तर और मध्य भारत में ज्यादा दिनों तक गर्मी का मौसम बना रह सकता है, जिससे लू की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।