कोरोना की दूसरी लहर की आशंका से डरी है होटल इंडस्ट्री

कोविड-१९महामारी के कारण लगातार व्यवसाय बंद हो रहे हैं और एनपीए भी बढ़ रहे हैं। वित्तीय वर्ष २०१९-२० के दौरान हुए कुल १.८२ लाख करोड़ रुपये राजस्व के मुकाबले केवल ३६,४०० करोड़ रुपये का ही राजस्व प्राप्त होने का अनुमान होटल इंडस्ट्री लगा रही है।

इस तरह इस व्यवसाय को १.१४ लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान होटल उद्योग ने लगाया है। वहीं होटल व्यवसाय शुरू न होने के कारण हॉस्पिटैलिटी व्यवसाय का बकाया कर्ज ५५,००० करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

एफएचआरएआई का मानना है कि यदि सरकार ने होटल व्यवसाय के हित वाली नीति नहीं लागू की तो देशभर के ४० से ५० प्रतिशत रेस्टोरेंट और ३० से ४० प्रतिशत होटल बंद पड़ जाएंगे। इसके चलते लाखों लोगों का रोजगार जाएगा। 

लॉकडाउन के दौरान बंद होने से स्टाफ को सैलरी भी नहीं थी, अब जब होटल खुले भी हैं तो व्यापार २० प्रतिशत ही बचा है। सरकार को सस्ते दरों में लोन देकर व्यापार को वापस ट्रैक पर लाने के लिए कोई पॉलिसी बनानी होगी, तब जाकर कहीं स्थिति साधारण हो पाएगी।

एफएचआरएआई के संयुक्त सचिव प्रदीप शेट्टी का कहना है कि केंद्र सरकार को होटल व्यवसाय को बचाने के लिए खासतौर से इस क्षेत्र के लिए कर्ज पुनर्गठन योजना लाने की जरूरत है। इससे कई मध्यम-छोटे होटल व्यवसाय को बंद होने से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश की होटल इंडस्ट्री फिर से लॉकडाउन लगने की आशंकाओं से चिंतित है।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को २५ करोड़ रुपये से कम के ऋण के लिए एसएमई और एमएसएमई के लिए प्रधानमंत्री ऋण योजना की तर्ज पर लोन एक्सटेंशन दिया जाय।

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