प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक एवं मानव-बंदर संघर्ष के गंभीर मुद्दे पर तैयार एसओपी के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। विनीत शर्मा एवं प्रजाक्ता सिंहल कि जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के बाद दिया।

अदालत ने विशेष रूप से गाजियाबाद एवं मथुरा जिले में की गई कार्यवाही के साथ प्रदेश के अन्य जिलों मे किये गए उपायों का विस्तृत एक्शन प्लान अगली तिथि से पूर्व कोर्ट के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि गाजियाबाद और मथुरा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बंदरों के बढ़ते आतंक एवं मानव-बंदर संघर्ष के गंभीर मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तैयार एसओपी के तहत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है।
याचियों की तरफ से अधिवक्ता पवन तिवारी एवं आकाश वशिष्ठ राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व विपक्षी नगर पालिका परिषद मुरादनगर के अधिवक्ता बालेश्वर चतुर्वेदी ने बंदरों के बढ़ते आतंक पर नियंत्रण की मांग की है।
अदालत को सरकार की ओर दी गई जानकारी में कहा गया है कि बंदर (रीसस मकाक) की संख्या, उनके हॉटस्पॉट क्षेत्रों एवं मानव-बंदर संघर्ष की स्थिति का वैज्ञानिक आंकलन हेतु विस्तृत सर्वेक्षण आवश्यक है, और इसके लिए लगभग एक वर्ष का समय लगेगा।
इस संबंध में वर्तमान एसओपी के तहत कार्यवाही किए जाने के अलावा एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की भी बात कही गई है। अदालत ने निर्देश दिया कि वर्तमान एसओपी के अंतर्गत जिला स्तर पर अब तक उठाए गए ठोस कदमों का विवरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए।
