नेपाल में बदलते राजनितिक परिदृश्यों के बीच जन ज़े देश में जल्द चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं और इन लोगों ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा था। कार्की ने भी अंतरिम नेतृत्व संभालने की इच्छा व्यक्त की है।

पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम सरकार की कमान संभालने के लिए तैयार हो गई हैं। पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा अंतरिम सरकार की कमान संभालने की इच्छा व्यक्त किए जाने के साथ सेना दंगों और अराजकता पर नियंत्रण कर रही है।
नेपाल सरकार ने पिछले हफ़्ते प्रमुख सोशल मीडिया वेबसाइट्स बंद कर दी थीं, जिसके कारण युवाओं में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे और इसे जन ज़े क्रांति का नाम दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि सुशीला कार्की का कहना है कि जेन ज़ी ने नेपाल में आंदोलन शुरू करने के बाद उनपर विश्वास किया है और वह एक छोटे समय के लिए सरकार चलाने को तैयार हैं। ताकि चुनाव कराए जा सकें।
कार्की ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनका पहला ध्यान उन लड़कों और लड़कियों पर होगा, जो आंदोलन में मारे गए। उन्होंने उनके लिए और उनके परिवारों के लिए कुछ करने की बात भी कही।
आगे उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन की पहली मांग प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा थी, जो पूरी हो गई है। अब अगली मांग देश से भ्रष्टाचार हटाने की है। इस बारे में उनका कहना है कि बाक़ी माँगें तभी पूरी हो सकती हैं, जब सरकार बनेगी।
बीती शाम जारी मंत्रालय के बयान के अनुसार, अब तक 1,061 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 719 को छुट्टी दे दी गई है, जबकि 274 लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।
नेपाल में हुए दंगों के दौरान 30 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, और कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी गई। इस बीच भविष्य पर चर्चा करने के लिए आंदोलन से जुड़े नेताओं ने बुधवार को सैन्य नेतृत्व से मुलाकात की। हालाँकि नेपाल के राष्ट्रपति या सेनाध्यक्ष की तरफ़ अंतरिम सरकार के गठन और उसके नेतृत्व के बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है।
वहीँ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के दौरान 13,500 से ज्यादा कैदी फरार हो गए हैं। जबकि हिरासत में लिए गए 560 आरोपी भी फरार हो गए। वहीं दूसरी ओर नेपाल की एक जेल में सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प में कम से कम 5 किशोर बंदियों की मौत की खबर है। इस बीच नेपाल की सेना ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन की आड़ में संभावित हिंसा को रोकने के लिए देशव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए और कर्फ्यू लगा दिया है।
गौरतलब है कि नेपाल में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं द्वारा हिंसक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हो गए। वहीं प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे, जिसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।












