कल का दिन संसद के इतिहास में दर्ज हो गया। यह दिन विपक्ष के नाम रहा। इसकी शुरुआत प्रियंका गाँधी से हुई। बीते दिन लोकसभा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने पहले भाषण में मोदी सरकार पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि ये सरकार देश की एकता को भी एक नहीं रख पा रही है। इस दौरान राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी का पूरा ध्यान रखा और कैमरा ज़रा भी हटने पर उन्होंने इसका तेज़ विरोध किया। प्रियंका का भाषण सत्ता पक्ष और विपक्ष ने ख़ामोशी से सुना।

देश की लोकसभा में बीता दिन विपक्ष के नाम से याद किया जाएगा। प्रियंका का भाषण 22 अप्रैल की सुबह से शुरू हुआ और एक एक बात दर्ज की और फिर उन शहीदों के नाम पढ़े। उन्होंने कहा कि शहीद होने वाले 26 में से 25 भारतीय थे। इसी क्रम में बोलते हुए उन्होंने शहादत का अर्थ बताया और अपने परिवार द्वारा दी गई शहादत का ज़िक्र किया।
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अमित शाह से सवाल किया कि पहलगाम की बायसरन घाटी में सुरक्षा वहां क्यों नहीं थी? क्या सरकार को मालूम नहीं था कि हजारों लोग वहां जाते हैं। लोग सरकार के भरोसे गए और सरकार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। ये किसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
अपनी मां सोनिया गांधी का जिक्र करते प्रियंका ने भावुक शब्दों में कहा कि गृह मंत्री ने आज मेरी मां के आंसुओं की बात की। मैं इसका जवाब देना चाहती हूं। मेरी मां के आंसू उस दिन गिरे थे, जब आतंकियों ने मेरे पिता की हत्या कर दी थी। उन्होंने आगे कहा कि आज जब मैं पहलगाम हमले के 26 पीड़ितों की बात करती हूं, तो इसलिए क्योंकि मैं उनके दर्द को महसूस करती हूं। मैंने भी अपना पिता खोया है, इसलिए मुझे पता है कि दुख क्या होता है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल ने भी बड़े ही स्पष्ट तथ्यों के साथ चीन और पाकिस्तान के मुद्दे को सामने रखा। राहुल ने कहा कि अगर आप इन दोनों को अलग मानकर चल रहे,तो बड़े धोखे में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारा मुकाबला इन दोनों के गठजोड़ से है।
अपने भाषण में राहुल ने सत्ता को ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाते हुए यह मांग रखी कि एक बार का नाम लेकर कह दें कि वह झूठा है, झूठ बोल रहा है। हालाँकि सत्तादल से किसी ने भी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी।
राहुल गाँधी ने ट्रंप द्वारा सीज़फ़ायर का श्रेय लेने, वार रुकवाने,पर सवाल किया और कहा कि सत्ता उनके पुरखों को कोसने के अलावा वर्तमान का एक भी जवाब नहीं दे सकी। इससे पहले विपक्ष की लगातार सफाई की मांग और राहुल गांधी के बार बार पूछे जाने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में ट्रंप का नाम न लेकर इतना ज़रूर कहा कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने के लिए नहीं कहा।
प्रियंका ने याद दिलाया कि जब मुम्बई अटैक पर मनमोहन सिंह से सवाल किए, तब अटैक के दिन सारे आतंकी वहीं मार गिराए जाने की बात उन्होंने कही। साथ ही एक बचने वाले को फांसी दिलवाने की बात भी कही। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ने इस हादसे की ज़िम्मेदारी ली। इसके अलावा प्रियंका ने संभल और मणिपुर का भी ज़िक्र किया।
बताते चलें कि राहुल उन 22 बच्चों को गोद लेने के बाद संसद आए थे जिन्होंने उस हमले में अपना बहुत कुछ खो दिया था। राहुल गांधी ने मई में पुंछ की यात्रा की थी। अपनी यात्रा के दौरान, गांधी ने स्थानीय पार्टी के नेताओं से प्रभावित बच्चों की सूची तैयार करने को कहा था। इसके बाद किए गए सर्वेक्षण और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद बच्चों के नाम को अंतिम रूप दिया गया।
