भारतीय क्रिकेट टीम की सूनी जर्सी को आखिरकार नया स्पॉन्सर मिल गया। एशिया कप 2025 में टीम इंडिया बिना किसी स्पॉन्सर के खेल रही थी। टीम इंडिया के स्पॉन्सर के लिए लगी बोली में अपोलो टायर्स ने बाजी मार ली है।

पिछले दिनों बीसीसीआई ने ड्रीम11 के साथ अपना करार खत्म कर दिया था। इसके बाद से भारतीय क्रिकेट बोर्डको नए स्पॉन्सर की तलाश थी। इसके लिए बोर्ड ने 2 सितंबर को आवेदन फॉर्म जारी कर दिए थे। इसकी अंतिम तारीख 16 सितंबर थी। और इसी दिन टीम इंडिया को नया स्पॉन्सर मिल गया।
भारतीय क्रिकेट टीम के जर्सी पर अब अपोलो टायर्स का नाम नज़र आएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अपोलो टायर्स बीसीसीआई को प्रत्येक द्विपक्षीय मुक़ाबले के लिए 4.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। गौरतलब है कि अभी तक खेले गए मैच में ड्रीम11 क्रिकेट बोर्ड को 4 करोड़ रुपये का भुगतान करता था।
बोर्ड और अपोलो टायर्स के बीच यह करार तीन वर्षों के हुआ है और यह रक़म 579 करोड़ रुपये का है, जो ड्रीम11 टीम द्वारा भुगतान की गई पिछली 358 करोड़ रुपये की राशि से अधिक है।
ओपोलो टायर्स का करार 28 मार्च 2028 तक के लिए किया गया है। दोनों के मध्य हुए इस करार में 121 द्विपक्षीय मैच और 21 आईसीसी मैच शामिल हैं। इस अवधि के दौरान कुल मिलाकर 130 मैच खेले जाएंगे।
अपोलो टायर्स ने बोली लगाए जाने के समय कैनवा और जेके टायरको पीछे छोड़कर बाजी जीती है। ख़बरों से पता चलता है कि बिड़ला ऑप्टस पेंट्स भी टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के लिए इच्छुक था मगर वह बोली में हिस्सा नहीं लेना चाहता था।
ड्रीम11 को सरकार के ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 के तहत बाहर कर दिया था। 2 सितंबर को जब बीसीसीआई द्वारा भारतीय टीम के प्रमुख स्पॉन्सर के लिए आवेदन जारी किए थे, तभी यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि गेमिंग, सट्टेबाजी, क्रिप्टो और तंबाकू ब्रांड को बोली में हिस्सा लेने के लिए प्रतिबंधित किया गया था।
जहाँ एक तरफ भारतीय पुरुष टीम दुबई में खेले जा रहे एशिया कप में बिना स्पॉन्सर के खेल रही है वहीं भारतीय महिला टीम भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय सिरीज में बिना स्पॉन्सर के हिस्सा ले रही है। अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि टीम इंडिया की जर्सी पर कब से अपोलो टायर्स का निशान नज़र आएगा।
दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी टायर निर्माता कंपनी अपोलो टायर्स लिमिटेड की शुरुआत 1972 में हुई थी। इसके चेयरमैन ओंकार सिंह कंवर जबकि वाइस चेयरमैन नीरज कंवर हैं। इस भारतीय टायर्स कंपनी का पहला संयंत्र भारत के राज्य केरल के पेरम्बरा, त्रिशूर में चालू किया गया था। भारत के अलावा इस कंपनी का कारोबार नीदरलैंड और हंगरी में भी था।















