रविवार को केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट 2026-27 पर पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अपनी बात रखी। उन्होंने इसे एक ऐसा बजट है जिसमें कोई आर्थिक रणनीति और आर्थिक समझदारी नहीं है। उन्होंने इसे एक ऐसा बजट बताया जिसमें कोई आर्थिक रणनीति नहीं है, कोई आर्थिक समझदारी नहीं है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पार्टी ऑफिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘बजट से पहले हर कमेंटेटर, लेखक और इकोनॉमिक्स का हर स्टूडेंट, आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो सुना, उससे हैरान होगा। मैं मानता हूं कि बजट सिर्फ सालाना कमाई और खर्च का बयान नहीं होता। मौजूदा हालात में बजट भाषण में एक ऐसी कहानी होनी चाहिए जो कुछ दिन पहले जारी किए गए इकोनॉमिक सर्वे में बताई गई बड़ी चुनौतियों का समाधान करे।’
पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा, ‘बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, संस्थानों, पहलों, फंडों, समितियों, हब वगैरह की संख्या बढ़ाने से थकतीं नहीं हैं। मैंने कम से कम 24 गिने। मैं यह आपकी कल्पना पर छोड़ता हूं कि इनमें से कितनी अगले साल तक भुला दी जाएंगी और गायब हो जाएंगी।’
पूर्व वित्तमंत्री ने सवाल किया कि पता कि सरकार और वित्त मंत्री ने इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पढ़ा है या नहीं? वित्तमंत्री के मुताबिक़, अगर उन्होंने पढ़ा होता तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे पूरी तरह से नजर अंदाज करने का फैसला कर लिया है और लोगों पर शब्द, खासकर शॉर्ट फॉर्म, फेंकने के अपने पसंदीदा काम पर वापस आ गए हैं।
पी चिदंबरम ने इस बजट पर एतराज जताते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में अहम सेक्टरों और कार्यक्रमों में फंड में कटौती की गई है। उनका कहना है कि बहुत ज्यादा तारीफ वाले जल जीवन मिशन पर खर्च को ‘बेरहमी से’ 67,000 करोड़ रुपये से घटाकर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने कम से कम दस चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा इनमे ‘खराब’ रोजगार की स्थिति, खासकर युवाओं में बेरोजगारी शामिल है। आगे उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में इनमें से किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक अकाउंटेंट के स्टैंडर्ड के हिसाब से 2025-26 में फाइनेंस के मैनेजमेंट का यह एक खराब हिसाब था।
रेवेन्यू रिसिप्ट्स में 78,086 करोड़ रुपये की कमी की याद दिलाते हुए उन्होंने कुल खर्च में 1,00,503 करोड़ रुपये की कमी की बात कही। आगे उन्होंने कहा कि रेवेन्यू खर्च में 75,168 करोड़ रुपये की कमी थी और कैपिटल खर्च में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती की गई (केंद्र 25,335 करोड़ रुपये और राज्य 1,19,041 करोड़ रुपये)। इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था कि इस खराब परफॉर्मेंस को स्पष्ट करने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा गया। उन्होंने केंद्र का कैपिटल खर्च 2024-25 में जीडीपी के 3.2 प्रतिशत से गिरकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत होने की बात कही।
सीनियर कांग्रेस नेता ने भाषण के पार्ट बी का हवाला देते हुए कहा, ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2026 के पास होने के महीनों बाद जो पहली अप्रैल, 2026 से लागू होगा। वित्त मंत्री ने कुछ रेट्स में बदलाव किया है। हालांकि कई छोटे-मोटे बदलावों के असर की सावधानी से जांच करनी होगी, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि ज्यादातर लोगों का इनकम टैक्स या इनकम टैक्स रेट से कोई लेना-देना नहीं है।’
इनडायरेक्ट टैक्स पर उन्होंने कहा कि आम आदमी का संबंध भाषण के सिर्फ पैराग्राफ 159, 160 और 161 से होगा। इन छोटी रियायतों का उन्होंने स्वागत किया।













