मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 को प्रभावी बनाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार व अन्य से जवाब तलब किया है। अदालत ने अपने सवाल में जानना चाहा है कि प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

इस मामले में अदालत ने राज्य के अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए विस्तृत हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दिया है। गौरतलब है कि अदालत ने यह निर्देश सनबीम वीमेंस कॉलेज वरुणा वाराणसी की याचिका पर दिया है।
याची संस्थान ने याचिका में एक महिला कर्मचारी की बहाली सहित उसे मातृत्व लाभ देने के आयोग के आदेश को चुनौती दी है। संस्थान का तर्क है कि जब तक राज्य सरकार केंद्र की अनुमति से आधिकारिक राजपत्र में विशेष अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक यह अधिनियम निजी शिक्षण संस्थानों पर कानूनी रूप से लागू नहीं होता।
मामले में सुप्रीम कोर्ट के अलावा केरल हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए याची की ओर से कहा गया कि शिक्षण संस्थान दुकान या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान की श्रेणी में नहीं आते। मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 2(1) के तहत राज्य सरकार की अधिसूचना के बिना इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता।
केस की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट का कहना है कि यह एक लाभकारी कानून है और राज्य सरकार का यह दायित्व था कि वह विभिन्न संस्थानों में कार्यरत लोगों के हित के लिए इसे अधिसूचित करे। मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होनी है और इस दौरान कोर्ट ने अगली सुनवाई तक महिला कर्मचारी की नियुक्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।















