सत्ता में आने के महज़ एक साल बाद ही थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को पद से बर्खास्त कर दिया है। थाईलैंड के संवैधानिक न्यायालय का कहना है कि पैतोंगटार्न ने अपने निजी हितों को राष्ट्र के हितों से ऊपर रखते हुए देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।

थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न को नैतिकता के उल्लंघन के आरोप में पद से हटाया गया है। उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई और वर्तमान मंत्रिमंडल कार्यवाहक के रूप में तब तक सरकार की देखरेख करेंगे जब तक कि संसद द्वारा नए प्रधानमंत्री का चयन नहीं हो जाता।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पैतोंगटार्न ने जून में लीक हुए एक टेलीफोन कॉल में नैतिकता का उल्लंघन किया है, जिसमें वह कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन के सामने झुकती हुई दिखाई दीं।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार दोनों देश जब सशस्त्र सीमा संघर्ष के कगार पर थे। कुछ सप्ताह बाद लड़ाई शुरू हुई जो पांच दिनों तक चली।6-3 के बहुमत से होने वाले फैसले में अदालत का कहना है कि पैतोंगटार्न ने अपने निजी हितों को राष्ट्र के हितों से ऊपर रखा और देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
बीते 17 वर्षों में पैतोंगतार्न शिनावात्रा संवैधानिक न्यायालय द्वारा हटाई जाने वाली पांचवीं प्रधानमंत्री बन गई हैं। उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई और वर्तमान मंत्रिमंडल कार्यवाहक के रूप में नए प्रधानमंत्री के चुने जाने तक इस सरकार की संभालेंगे। इसके लिए तिथि का चुनाव सदन के अध्यक्ष द्वारा होगा। संविधान में निचले सदन की बैठक कब होनी चाहिए, इसकी भी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के हवाले से मिलने वाली ख़बरों में यह भी कहा गया है कि अदालत के इस फैसले से पार्टियों और अन्य सत्ता-दलालों के बीच सौदेबाजी का रास्ता खुल गया है। जिसका केंद्रबिंदु पैतोंगटार्न के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा हो सकते हैं।
बताते चलें कि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास केवल सात सीटों का मामूली बहुमत है, ऐसे में गठबंधन से किसी भी तरह की निष्ठा का बदलाव शिनावात्रा राजनीतिक परिवार के लिए भरी पड़ सकता है।
इसके अलावा सत्ता में आने के केवल एक साल बाद ही होने वाली इस बर्खास्तगी के चलते थाईलैंड में राजनीतिक उथल-पुथल की भी आशंका बनी हुई है।
