सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को जरूरी बनाने के लिए अधिक लोग वोट डालने की बात कही है। अदालत का कहना है कि अधिक वोटिंग से बेहतर उम्मीदवार सामने आएंगे और नोटा विकल्प धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो जाएगा।

लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोटिंग को अनिवार्य बनाने वाले तंत्र की आवश्यकता पर जोर ज़ोर देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा कोई गैर-दंडात्मक तंत्र बनाया जा सकता है, जिससे अधिक लोग वोट डालें, बेहतर उम्मीदवार सामने आएं और नोटा विकल्प धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो सके।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नोटा को कैंडिडेट बनाने के लिए, पार्लियामेंट को रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट में बदलाव करना होगा। दरअसल यह मामला उस समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की एक पीआईएल पर सुनवाई कर रही थी। पीआईएल में उन इलाकों में नोटा को कैंडिडेट बनाने की बात कही गई थी, जहां केवल एक कैंडिडेट मैदान में हो, ताकि यह पता चल सके कि अकेले कैंडिडेट पर वोटर का भरोसा है या नहीं।
मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि नोटा (None of the Above) का ऑप्शन बेहतर कैंडिडेट को मैदान में खींचने और वोटर को अपनी वोटिंग का इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। कोर्ट के मुताबिक़, एक दशक के अनुभव से पता चलता है कि बहुत कम प्रतिशत में वोटर्स इस विकल्प का प्रयोग करते हैं।
